“बनारस क्लब में फर्जीवाड़े का बड़ा खेल? कोर्ट पहुंचा मामला, 23 मई की सुनवाई पर टिकी शहर की नजर”
वाराणसी(जनवार्ता)। शहर के प्रतिष्ठित बनारस क्लब से जुड़ा विवाद अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। कथित फर्जी दस्तावेज, कूटरचना और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोपों को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र तिवारी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मामले की गूंज अब अदालत से लेकर शहर के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों तक सुनाई देने लगी है।

याचिका में दावा किया गया है कि क्लब से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों में कथित तौर पर हेरफेर कर फैसले लिए गए। आरोप इतने गंभीर बताए जा रहे हैं कि अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 23 मई को तय करते हुए पूरे प्रकरण पर नजर बनाए रखी है। माना जा रहा है कि इस तारीख पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
अधिवक्ता पक्ष ने न्यायालय में कहा है कि यदि दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच हुई तो “बड़े स्तर पर अनियमितताओं” का खुलासा हो सकता है। वहीं क्लब प्रशासन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को पूरी तरह नियमसम्मत बताया है। प्रशासन का कहना है कि संस्था का संचालन कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जा रहा है और आरोप केवल क्लब की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से लगाए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, सरकारी पक्ष की ओर से भी न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराई गई है, जिससे मामला और अधिक पेचीदा और हाई-प्रोफाइल बन गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोपों में दम साबित हुआ तो इसका असर क्लब की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
शहर की सबसे चर्चित संस्थाओं में शामिल बनारस क्लब पर उठे इन सवालों ने वाराणसी में नई बहस छेड़ दी है। अब हर किसी की नजर 23 मई की सुनवाई पर टिकी है, जहां अदालत का अगला कदम इस हाई-प्रोफाइल विवाद की दिशा तय कर सकता है।

