गुलाम भारत में स्वतंत्र चेतना के ध्वजवाहक थे वीर सावरकर : राकेश सिंह अलगू
डीसीएफ में मनाई गई वीर सावरकर जयंती
वाराणसी (जनवार्ता)। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं डीसीएफ के सभापति राकेश सिंह अलगू ने कहा कि वीर सावरकर गुलाम भारत में स्वतंत्र चेतना के ध्वजवाहक थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन की कठोर यातनाएं सहने के बावजूद राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र निर्माण के अपने संकल्प से कभी समझौता नहीं किया।
वह डीसीएफ परिसर में आयोजित वीर सावरकर जयंती कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सावरकर ने अभाव, पीड़ा और संघर्ष के बीच अपने आत्मबल के सहारे स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। कालापानी की सजा के दौरान उन्होंने 11 वर्षों तक अमानवीय यातनाएं झेलीं, लेकिन उनका मनोबल कभी नहीं टूटा।
राकेश सिंह अलगू ने कहा कि जब तत्कालीन कांग्रेस नेताओं को जेल में सुविधाएं मिल रही थीं, उस समय सावरकर अंडमान की अंधेरी कोठरी में बेड़ियों से जकड़े हुए चक्की चलाने को मजबूर थे। उन्होंने जेल की दीवारों पर कोयले से राष्ट्रभक्ति की कविताएं लिखीं और देशभक्ति की अलख जगाई।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत ने सावरकर को दो जन्मों के कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हंसते हुए स्वीकार किया। ऐसे महान राष्ट्रभक्त को डीसीएफ और सहकारिता परिवार की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने वीर सावरकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।


