उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान के पैतृक आवास को संग्रहालय बनाने की पहल तेज, महापौर और नगर आयुक्त से परिवार की बैठक

उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान के पैतृक आवास को संग्रहालय बनाने की पहल तेज, महापौर और नगर आयुक्त से परिवार की बैठक

वाराणसी। भारत रत्न की सांगीतिक विरासत को संरक्षित करने और उनके पैतृक आवास को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। इसी क्रम में शुक्रवार को वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के साथ उस्ताद के परिजनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान चैरिटेबल ट्रस्ट की सचिव एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता सविता आनंद के आग्रह पर हुआ।

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बैठक में उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान के पैतृक आवास के संरक्षण, उसे संग्रहालय के रूप में विकसित करने, वहां तक जाने वाले मार्ग के सौंदर्यीकरण तथा उनकी स्मृतियों को स्थायी रूप से संरक्षित करने से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।


महापौर अशोक तिवारी ने कहा कि वाराणसी भारतीय संस्कृति की जीवंत राजधानी है और इस भूमि ने देश को अनेक महान विभूतियां दी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उन महान व्यक्तित्वों की विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्होंने काशी और देश का गौरव विश्व पटल पर बढ़ाया है। इसी उद्देश्य से उनसे जुड़े स्थलों के संरक्षण एवं विकास की योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।


ट्रस्ट की सचिव सविता आनंद ने कहा कि वह लंबे समय से उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान के पैतृक आवास को संग्रहालय के रूप में विकसित किए जाने की मांग उठाती रही हैं। उन्होंने कहा कि यह भवन केवल एक मकान नहीं, बल्कि भारतीय संगीत इतिहास की अमूल्य धरोहर है, जहां से शहनाई की वह साधना निकली जिसने इस वाद्य यंत्र को वैश्विक पहचान दिलाई।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि पैतृक आवास के विकास की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। साथ ही वहां तक पहुंचने वाले मार्ग का विशेष सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। मार्ग पर आकर्षक प्रवेश द्वार, हेरिटेज लाइटिंग तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित कर उसे सांस्कृतिक पहचान प्रदान की जाएगी।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि , जहां उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान नियमित रूप से प्रातःकालीन रियाज किया करते थे, के सौंदर्यीकरण की भी योजना तैयार की जा रही है। प्रस्तावित योजना के तहत वहां उस्ताद की प्रतिमा स्थापित की जाएगी तथा उनकी शहनाई की धुनों के स्थायी प्रसारण की व्यवस्था की जाएगी, जिससे यह स्थल संगीत प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।
बैठक में उस्ताद के पोते अफाक़ हैदर ने परिवार की वर्तमान परिस्थितियों से अधिकारियों को अवगत कराते हुए परियोजना के क्रियान्वयन में परिवार की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने परिवार के वरिष्ठ सदस्य सिप्तैन हुसैन की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया और उनके लिए आजीविका संबंधी सहायता उपलब्ध कराने की मांग रखी। प्रशासन की ओर से परिवार को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया गया।
बैठक के अंत में सविता आनंद ने महापौर और नगर आयुक्त का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि यह परियोजना न केवल उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान की स्मृतियों को संरक्षित करेगी, बल्कि वाराणसी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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Shiv murti

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