साइबर ठगों ने अपनाई नई चाल, गेमिंग ऐप के क्यूआर कोड से मंगा रहे ठगी की रकम
वाराणसी (जनवार्ता)। ऑनलाइन ठगी के मामलों में साइबर अपराधियों ने अब नया तरीका अपनाना शुरू कर दिया है। पहले जहां ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों में मंगाई जाती थी, वहीं अब अपराधी गेमिंग और ऑनलाइन बेटिंग ऐप के खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे रकम की ट्रैकिंग और पीड़ितों को धनराशि वापस दिलाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

साइबर सेल के अनुसार, ठग पहले विभिन्न गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म पर अपने खाते बनाते हैं और उनसे जुड़े क्यूआर कोड या पेमेंट लिंक तैयार कर लेते हैं। इसके बाद ठगी का शिकार हुए लोगों से इन्हीं क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान कराया जाता है। पैसा सीधे बैंक खाते में जाने के बजाय गेमिंग वॉलेट या ऐप अकाउंट में पहुंचता है, जिससे उसके स्रोत और गंतव्य का पता लगाना कठिन हो जाता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि ठग गेमिंग वॉलेट में पैसा आने के बाद उसे निकाल लेते हैं या फिर उसी प्लेटफॉर्म पर गेमिंग और बेटिंग में लगा देते हैं। साइबर सेल प्रभारी मनोज तिवारी ने बताया कि हाल के 12 से 13 मामलों में इस तरह की कार्यप्रणाली सामने आई है। आरोपियों ने ठगी की रकम अपने गेमिंग वॉलेट में मंगवाई और बाद में उसे निकाल लिया या सट्टेबाजी में इस्तेमाल कर दिया।
अधिकारियों का कहना है कि गेमिंग और बेटिंग प्लेटफॉर्म पर धनराशि कई स्तरों से होकर गुजरती है, जिससे लेनदेन की जांच और रिकवरी की प्रक्रिया लंबी तथा जटिल हो जाती है। यही कारण है कि साइबर अपराधी इस माध्यम का तेजी से उपयोग कर रहे हैं।
इधर, सोनभद्र के बीजपुर क्षेत्र में साइबर टीम ने ठगी के शिकार एक व्यक्ति की 4,450 रुपये की धनराशि वापस कराकर राहत दिलाई। ग्राम झीलों निवासी कमलेश से अज्ञात व्यक्ति ने ऑनलाइन धोखाधड़ी कर रुपये निकाल लिए थे। पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर साइबर टीम ने एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से जांच शुरू की और संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित कर कार्रवाई करते हुए पूरी धनराशि वापस कराई। पुलिस ने लोगों से किसी भी संदिग्ध लिंक, क्यूआर कोड या ऑनलाइन भुगतान अनुरोध के प्रति सतर्क रहने की अपील की है।

