मांस-मछली की दुकानों के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

मांस-मछली की दुकानों के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

वाराणसी (जनवार्ता)। नगर निगम द्वारा मांस, मछली और मुर्गा की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के विरोध में रविवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, श्रमजीवियों तथा मांस, मछली एवं मुर्गा व्यवसाय से जुड़े लोगों ने मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपकर निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की।

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ज्ञापन में कहा गया कि प्रस्तावित विस्थापन से हजारों व्यापारियों, श्रमिकों और मछली कारोबार से जुड़ी महिलाओं की आजीविका प्रभावित होगी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वाराणसी एक बहुलतावादी और विविध सांस्कृतिक परंपराओं वाला शहर है, जहां विभिन्न समुदायों के लोग लंबे समय से अपनी-अपनी जीवनशैली और खान-पान के साथ सौहार्दपूर्ण ढंग से रहते आए हैं।

वक्ताओं ने कहा कि मांस और मछली का व्यापार किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न समुदायों के लोग जुड़े हैं। उनका तर्क था कि बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और ऑनलाइन माध्यमों से मांस-मछली की बिक्री जारी रहने के बावजूद छोटे दुकानदारों को शहर से बाहर भेजने का प्रस्ताव विरोधाभासी प्रतीत होता है।

ज्ञापन में नगर निगम द्वारा दुकानों को शिवपुर, रामनगर, अवलेशपुर, गणेशपुर और सुजाबाद जैसे शहर से दूर क्षेत्रों में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को अव्यावहारिक बताया गया। उनका कहना था कि इससे व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को असुविधा होगी तथा स्थानीय व्यापार प्रभावित होगा।

ज्ञापन में मांग की गई कि प्रस्तावित विस्थापन की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके बजाय शहर में पहले से संचालित मांस एवं मछली मंडियों को नियमित कर स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए। व्यापारियों ने बिजली, पानी, कचरा प्रबंधन, शीत भंडारण, ग्रीन नेट, फ्लाई कैचर और पक्की दुकानों जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की।

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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और व्यापारियों की आजीविका—तीनों के बीच संतुलन बना रहे।

Shiv murti

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