मां स्याही देवी मंदिर की रहस्यमयी मान्यताएं, दिन में तीन बार बदलता है प्रतिमा का स्वरूप
अल्मोड़ा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के शीतलाखेत क्षेत्र में स्थित प्राचीन मां स्याही देवी मंदिर अपनी रहस्यमयी मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां स्थापित मां स्याही देवी की प्रतिमा दिन में तीन बार अलग-अलग स्वरूप धारण करती है, जिससे यह मंदिर श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।

लोककथाओं के अनुसार, कत्यूरी शासनकाल में इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में हुआ था। मंदिर के निर्माण में चूने या सीमेंट के बजाय बेल और गुड़ के मिश्रण का प्रयोग किया गया था। यह भी मान्यता है कि निर्माण के लिए तैयार की गई ईंटें तेज बारिश के बावजूद अगले दिन पूरी तरह पक चुकी थीं।
मां स्याही देवी को अल्मोड़ा के तत्कालीन राजाओं की कुलदेवी और आसपास के 52 गांवों की इष्ट देवी माना जाता है। कहा जाता है कि पहले देवी की प्रतिमा दूसरी पहाड़ी पर स्थापित थी, जिसके बाद वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर की पूजा-अर्चना की परंपरा आज भी गुरु गोरखनाथ परंपरा के वंशज निभा रहे है

