‘एक देश, एक पंचांग’ पर काशी में ज्योतिषाचार्यों का मंथन
वाराणसी (जनवार्ता)। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से प्रकाशित पंचांगों में व्याप्त भिन्नता दूर कर ‘एक देश, एक पंचांग’ की व्यवस्था लागू करने की जरूरत पर काशी में ज्योतिषाचार्यों और विद्वानों ने मंथन किया। वक्ताओं ने कहा कि पंचांगों में एकरूपता से सनातन समाज को एकजुट करने में मदद मिलेगी।

सिगरा स्थित होटल ग्रैंड में रविवार को ज्योतिष वैज्ञानिकी शोध पत्रिका के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा कि छोटे-छोटे मतभेदों को दूर कर सनातन समाज को एकजुट करने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने ज्योतिष को भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि यह केवल भविष्य बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि खगोलीय घटनाओं और ग्रहों की गति का अध्ययन भी करता है।
ज्योतिष विज्ञान समिति के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने कहा कि पंचांगों की भिन्नता दूर करने के लिए सार्थक प्रयास किए जाएंगे। नागरीप्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय ने कहा कि ज्योतिष भाग्य बदलने के बजाय उसके बारे में संकेत देता है। बीएचयू के प्रो. सुभाष पांडेय ने ज्योतिष और विज्ञान के संबंध पर विचार रखे। समारोह में शोध पत्रिका का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण और दीप प्रज्वलन से हुई।
डिजिटल लाइब्रेरी बनाने का सुझाव
बीएचयू के डा. एसएस पांडेय ने युवाओं को भारतीय संस्कृति और विद्वानों की ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए डिजिटल लाइब्रेरी बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में डिजिटल माध्यम युवाओं तक पारंपरिक ज्ञान पहुंचाने का प्रभावी जरिया बन सकता है।

