राजर्षि के विचार आज भी शिक्षा को दे रहे नई दिशा
शिक्षा का उद्देश्य चरित्र, चेतना और जीवन-मूल्यों का निर्माण : प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी

वाराणसी। उदय प्रताप कॉलेज के प्राचीन छात्र भवन में बुधवार को पूज्य राजर्षि की स्मृति में ‘वर्तमान शिक्षा में मूल्य—राजर्षि के शिक्षा संबंधी विचार’ विषय पर विचारगोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना और रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, चेतना और जीवन-मूल्यों का निर्माण करना होना चाहिए।

मुख्य अतिथि केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थान, सारनाथ के कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘विद्यार्थी’ शब्द में ही शिक्षा का गहरा दर्शन निहित है। भारतीय ऋषि परंपरा ने विश्व को चेतना के अस्तित्व और उसके महत्व का बोध कराया। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को असत्य से सत्य, अंधकार से ज्योति और मृत्यु से अमृत की ओर ले जाना होना चाहिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में इन जीवन-मूल्यों को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है।

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि राजर्षि यदि आज हमारे बीच होते तो 176 वर्ष के होते। किसी महान व्यक्ति का महत्व केवल उसके भौतिक अस्तित्व से नहीं, बल्कि उसके विचारों की दीर्घकालिक प्रभावशीलता से आंका जाता है। राजर्षि के विचार आज भी समाज और शिक्षा व्यवस्था को दिशा देने में पूरी तरह प्रासंगिक हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ राजर्षि के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस अवसर पर उदय प्रताप कॉलेज प्राचीन छात्र परिषद की ओर से प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. एस. जे. सिंह को सम्मानित किया गया। उनकी अनुपस्थिति में उनकी पुत्री डॉ. नीलिमा सिंह ने सम्मान ग्रहण किया।
विचारगोष्ठी में डॉ. कृष्ण कुमार सिंह, चेतनारायण सिंह एवं डॉ. विनय कुमार सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने राजर्षि के शैक्षिक चिंतन, भारतीय मूल्य परंपरा तथा वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अरविन्द कुमार सिंह ने किया। स्वागत भानु प्रताप सिंह और धन्यवाद ज्ञापन अमरनाथ सिंह ने किया।
इस अवसर पर अशोक आनंद, यादवेंद्र सिंह, डॉ. गोरखनाथ, डॉ. अलका रानी गुप्ता, डॉ. अनिल कुमार सिंह, डॉ. रमेश प्रताप सिंह, डॉ. अनीता सिंह, राणा प्रताप सिंह, महेंद्र प्रताप सिंह एवं सत्येंद्र बहादुर सिंह सहित बड़ी संख्या में प्राचीन छात्र एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

