कानपुर में 5600 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, दो गिरफ्तार

कानपुर में 5600 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, दो गिरफ्तार

76 फर्जी कंपनियों की भी जांच

कानपुर । कानपुर पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने अब तक की बड़ी साइबर ठगी के मामले का खुलासा करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार चमनगंज और बेकनगंज क्षेत्र के रहने वाले दोनों आरोपित ऑनलाइन गेमिंग, क्रिकेट सट्टा, निवेश और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों से रकम ठगने वाले नेटवर्क से जुड़े हैं। प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क से करीब 5600 करोड़ रुपये की संदिग्ध ठगी का कनेक्शन सामने आया है।

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पुलिस ने बेकनगंज के तलाक महल निवासी शाहवेज वारिस को हैदराबाद से गिरफ्तार किया। वहां की अदालत में पेश करने के बाद उसे 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर लाया गया। उसकी निशानदेही पर चमनगंज निवासी सलमान को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार दोनों आरोपितों से पूछताछ जारी है और उनके बैंक खातों, फर्जी कंपनियों तथा रकम के लेनदेन की जांच की जा रही है।

86 शिकायतों में दोनों आरोपितों के नाम

पुलिस के मुताबिक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दोनों के खिलाफ कुल 86 शिकायतें दर्ज हैं। शाहवेज वारिस से जुड़े 11 बैंक खातों के संबंध में करीब 170 करोड़ रुपये की ठगी का उल्लेख है। वहीं सलमान के दो प्रमुख बैंक खातों के खिलाफ 32 शिकायतें मिली हैं, जिनमें करीब 16 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की रकम बताई गई है। पुलिस शिकायतों और बैंक खातों के विवरण का मिलान कर रही है।

76 फर्जी कंपनियां बनाकर रकम खपाने का आरोप

जांच में आरोपितों से जुड़ी करीब 76 बोगस फर्मों का भी पता चला है। पुलिस को आशंका है कि इन फर्मों और उनसे जुड़े बैंक खातों के जरिये ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसका लेनदेन किया जाता था। साइबर टीम फर्मों के पंजीकरण, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल लेनदेन और दस्तावेजों की जांच कर रही है।

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निवेश और सट्टे में ज्यादा मुनाफे का देते थे लालच

पुलिस के अनुसार आरोपित लोगों को कम समय में रकम कई गुना करने का लालच देकर निवेश के नाम पर फंसाते थे। इसके अलावा ऑनलाइन गेमिंग और क्रिकेट मैच में सट्टे से मुनाफा कमाने का झांसा देकर भी खातों में रकम मंगाई जाती थी। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

मुकदमे के बाद जारी हुआ था लुकआउट नोटिस

पुलिस जांच के अनुसार शाहवेज के खिलाफ 18 अगस्त को मुकदमा दर्ज होने के बाद लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। वह विदेश भागने की कोशिश में था, लेकिन हैदराबाद एयरपोर्ट पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद कानपुर साइबर क्राइम टीम उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर आई। पुलिस अब उसके विदेश में संपर्कों और वहां से साइबर नेटवर्क संचालित किए जाने की संभावना की भी जांच कर रही है।

इस मामले से जुड़े अन्य आरोपितों के कनेक्शन भी पुलिस खंगाल रही है। इससे पहले जाजमऊ निवासी चांद सिद्दीकी और बेकनगंज निवासी मो. अमान खान को भी एक अन्य साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार चांद के एक खाते में 33.82 करोड़ और अमान के एक खाते में 559 करोड़ रुपये के लेनदेन सामने आए थे।

पुराने साइबर ठगी मामलों से भी जोड़ा जा रहा कनेक्शन

कानपुर में इससे पहले भी बड़े साइबर और आर्थिक अपराध के मामले सामने आ चुके हैं। दिसंबर 2025 में रवींद्र सोनी को करीब 1500 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। वहीं मई 2026 में महफूज अली उर्फ पप्पू छूरी की गिरफ्तारी करीब 3200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में हुई थी। पुलिस अब शाहवेज और सलमान के नेटवर्क का इन पुराने मामलों से भी कनेक्शन तलाश रही है।

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साइबर टीम एनसीआरपी की शिकायतों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन का मिलान कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित 5600 करोड़ रुपये के नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं, रकम किन-किन खातों में पहुंची और 76 फर्जी कंपनियों के माध्यम से धन का संचालन किस तरह किया जाता था। जांच आगे बढ़ने पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आने की संभावना है।

Shiv murti

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