बारिश में निकली चेतगंज की नक्कटैया
140वें आयोजन में 100 से अधिक लाग-विमानों ने मोहा मन, तेजस-राफेल की झांकियां रहीं आकर्षण
वाराणसी (जनवार्ता) । लगातार बारिश के बीच गुरुवार रात चेतगंज की ऐतिहासिक नक्कटैया निकाली गई। खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। छाता और रेनकोट लेकर पहुंचे लोगों ने सड़क किनारे खड़े होकर लाग-विमानों के दर्शन किए। मलदहिया से लहुराबीर, चेतगंज और पानदरीबा तक करीब पांच किलोमीटर क्षेत्र में भोर तक मेले की रौनक रही।
रामायण प्रसंग के तहत शूर्पणखा की नाक काटने की लीला का मंचन हुआ। इसके बाद शूर्पणखा की झांकी मलदहिया पटेल चौराहा होते हुए चेतगंज थाने के पास पहुंची, जहां लाग-विमानों का शुभारंभ हुआ। जय श्रीराम और हर-हर महादेव के जयकारों से क्षेत्र गूंज उठा।

मेले में तेजस, सुखोई और राफेल लड़ाकू विमानों की प्रतिकृतियां, बाबा नीम करौली की झांकी और मोबाइल फोन के दुष्प्रभावों को दर्शाती लाग आकर्षण का केंद्र रहीं। काशी समेत प्रयागराज, मिर्जापुर, जौनपुर, भदोही, आजमगढ़, चंदौली और सोनभद्र के कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं।
वर्ष 1888 में स्वर्गीय बाबा फतेह राम ने ब्रिटिश शासन के अत्याचारों के विरोध में इस परंपरा की शुरुआत की थी। स्वांग और लाग-विमानों के जरिए जनचेतना जगाने वाला यह आयोजन आज काशी की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।
हालांकि, बारिश से दुकानदारों और कलाकारों को परेशानी हुई। मिट्टी के खिलौने और चाट की दुकानें नहीं सज सकीं। खराब मौसम के कारण दूर-दराज से आने वाले दर्शकों की संख्या भी कम रही।

