छुट्टी न मिलने से महिला सिपाही की मौत का आरोप
विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
बस्ती (जनवार्ता)। लालगंज थाने में तैनात महिला सिपाही केसरी वर्मा की मौत के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के पति एवं सिपाही नागेंद्र वर्मा ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर समय से छुट्टी मंजूर नहीं करने तथा लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया है। पति का दावा है कि छुट्टी नहीं मिलने के कारण पत्नी का समय पर बेहतर इलाज नहीं हो सका।


नागेंद्र वर्मा के अनुसार, कुछ दिन पहले केसरी वर्मा सड़क हादसे में घायल हुई थीं। हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट आई थी और टांके भी लगे थे। सीटी स्कैन और अन्य मेडिकल जांच के बाद चिकित्सकों ने न्यूरोलॉजिस्ट से उपचार कराने और जरूरत पड़ने पर लखनऊ के किसी बड़े अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी थी।
पति का आरोप है कि 27 अगस्त को उन्होंने पत्नी की सीटी स्कैन रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज और दवाओं से संबंधित कागजात के साथ अवकाश (EL) के लिए आवेदन किया था। आवेदन में पत्नी की गंभीर स्थिति और तत्काल अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता का उल्लेख किया गया था। आरोप है कि उनकी छुट्टी की अर्जी मंजूर करने के बजाय कागजात यह कहते हुए वापस कर दिए गए कि ईएल मंजूर नहीं होगी और मेडिकल लीव मिलेगी। साथ ही सोमवार को आने के लिए कहा गया।
नागेंद्र का आरोप है कि छुट्टी नहीं मिलने के चलते वह समय रहते केसरी को लखनऊ ले जाकर बेहतर उपचार नहीं करा सके। इलाज में हुई कथित देरी के बाद उनकी मौत हो गई। उन्होंने छुट्टी प्रकरण में सीआरके और दीपक मिश्रा को जिम्मेदार बताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
पति का कहना है कि जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, वह पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने देंगे। घटना के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, केसरी वर्मा की मौत वास्तव में इलाज में कथित देरी और छुट्टी नहीं मिलने के कारण हुई या इसके पीछे कोई अन्य चिकित्सकीय कारण था, यह जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मामले में विभागीय स्तर पर जांच होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता सामने आएगी।

