सीएम और सीपी के निर्देश की धज्जियां: वाराणसी में बदमाशों के हौसलों बुलंद लेखपाल पर स्कॉर्पियो चढ़ाने का प्रयास, फाड़े सरकारी कागजात
वाराणसी (जनवार्ता): प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के सख्त निर्देशों के बावजूद राजस्व कर्मियों के साथ बदसलूकी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला वाराणसी के वरुणा जोन के शुद्धिपुर गांव का है, जहां सोमवार की शाम संपूर्ण समाधान दिवस के तहत शिकायत की जांच करने गए एक लेखपाल के साथ मारपीट की गई और सरकारी दस्तावेज फाड़ दिए गए।उपजिलाधिकारी सदर के आदेश पर लेखपाल रितेश सिंह और उनके साथी अभिषेक जायसवाल शुद्धिपुर तरना स्थित एक गाड़ी धुलाई सर्विस सेंटर से जुड़ी शिकायत की जांच के लिए पहुंचे थे। जांच के दौरान जैसे ही उन्होंने विपक्षी सूर्यबली से कागजात मांगे, वहां मौजूद उसके भाई चंद्रशेखर ने लेखपाल से अभद्रता शुरू कर दी। आरोप है कि चंद्रशेखर ने लेखपाल से पूछा, “तुम किस विभाग से हो और मेरा ही सर्विस सेंटर की जांच कर रहे हो या पूरे बनारस का?”


मामले ने तब और विकराल रूप धारण कर लिया जब मौके पर एक काली स्कॉर्पियो पर सवार होकर रोहित सिंह नामक युवक पहुंच गया। आरोप है कि रोहित ने गाड़ी से उतरते ही लेखपाल को गालियां देना शुरू कर दिया और जान से मारने की नीयत से उन पर गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया। लेखपाल किसी तरह बाल-बाल बचे। इसके बाद आरोपियों ने लेखपाल के हाथ से सरकारी दस्तावेज छीनकर फाड़ दिए।
इसी दौरान सचिन नाम के एक अन्य युवक और उसके साथियों ने भी आकर लेखपाल के साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि सचिन ने लेखपाल की कमीज की जेब से जबरन 800 रुपए भी छीन लिए। लेखपाल के साथी अभिषेक जायसवाल ने जब बीच-बचाव का प्रयास किया, तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की।
घटना की सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार शैलेश सिंह और प्रीति पांडे मौके पर पहुंच गए। थाना प्रभारी शिवपुर वीरेंद्र कुमार सोनकर के आने के बाद दोनों लेखपालों को थाने लाया जा सका। थाना प्रभारी ने बताया कि लिखित शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और एक आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी वरुणा जोन के चौबेपुर थाना क्षेत्र के खुटहना गांव में राजस्व कर्मियों के साथ अभद्रता और सरकारी कार्य में बाधा डालने का मामला सामने आ चुका है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से सरकारी कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।

