वाराणसी रोपवे: 50 रुपये में कैंट से गोदौलिया तक आसमानी सफर

वाराणसी रोपवे: 50 रुपये में कैंट से गोदौलिया तक आसमानी सफर

■ 16-18 मिनट में दिखेगा काशी का विहंगम नजारा ■ 148 गोंडोला में 1,480 यात्रियों की क्षमता ■ एसी नहीं क्रॉस वेंटिलेशन की व्यवस्था ■ मौसम और तकनीकी सुरक्षा के इंतजामों के बीच रोपवे के नीचे बने भवनों की सुरक्षा भी अहम सवाल

rajeshswari

वाराणसी(जनवार्ता)। काशी में शहरी परिवहन को सुगम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई रोपवे परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है। परियोजना के स्टेशनों का निर्माण लगभग 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है। कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक रोपवे से सफर करने में 16 से 18 मिनट लगेंगे। प्रस्तावित किराया व्यवस्था के अनुसार, एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक का टिकट 10 रुपये और कैंट से गोदौलिया तक अधिकतम किराया 50 रुपये रखा गया है। जनवार्ता की टीम ने रोपवे स्टेशन और गोंडोला में बैठकर परियोजना की तैयारियों का जायजा लिया।

148 गोंडोला में 1,480 यात्रियों की क्षमता

परियोजना में कुल 148 गोंडोला संचालित किए जा सकेंगे। प्रत्येक गोंडोला में 10 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है। सभी गोंडोला की संयुक्त क्षमता 1,480 यात्रियों की होगी। इससे स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों और रेलवे यात्रियों को आवागमन का नया विकल्प मिलेगा। व्यस्त सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने और समय बचाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

हवा में सफर के साथ दिखेगा काशी का नजारा

रोपवे से यात्रा के दौरान शहर का विहंगम दृश्य दिखाई देगा। डमरू के आकार से प्रेरित गोंडोला के बाहरी शीशों पर काशी के घाटों और मंदिरों से संबंधित चित्र बनाए गए हैं। नगर निगम की ओर से स्टेशनों और आसपास के क्षेत्रों को काशी की संस्कृति के अनुरूप सजाने-संवारने का काम किया जा रहा है।

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गोंडोला में एसी की व्यवस्था नहीं है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इनमें हवा के आवागमन के लिए क्रॉस वेंटिलेशन की सुविधा दी गई है, जिससे केबिन के भीतर हवा का संचार बना रहेगा और गर्मी के दिनों में यात्रियों को सुविधा मिलेगी।

मौसम और तकनीकी सुरक्षा के इंतजाम

स्टेशनों पर मौसम की निगरानी के लिए उपकरण लगाए गए हैं। तेज हवा या आंधी-तूफान की आशंका और निर्धारित सुरक्षा मानकों के प्रतिकूल मौसम में संचालन रोक दिया जाएगा। सभी गोंडोला और स्टेशनों पर सेंसर लगाए गए हैं, जो तकनीकी गड़बड़ी या असामान्य स्थिति का पता लगाने में मदद करेंगे। ऐसी स्थिति में संचालन रोकने की व्यवस्था है। आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष दस्ता सदैव तैनात रहेगा।

स्टेशनों पर मेट्रो की तर्ज पर टिकट काउंटर और ऑटोमेटिक गेट बनाए गए हैं। यात्री टिकट लेकर प्रवेश करेंगे और लिफ्ट, एस्केलेटर तथा सीढ़ियों से बोर्डिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंचेंगे। कैंट और गोदौलिया में गोंडोला के रखरखाव के लिए वर्कशॉप भी बनाई गई हैं। भारी सामान के साथ यात्रा की अनुमति नहीं होगी।

रोपवे के नीचे बने भवनों की सुरक्षा का सवाल

परियोजना से परिवहन और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, लेकिन रोपवे के नीचे स्थित भवनों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। केबल, टावर और गोंडोला के नीचे रिहायशी तथा अन्य भवनों की मौजूदगी में सुरक्षित दूरी, आवश्यक क्लियरेंस, तकनीकी खराबी और आपातकालीन निकासी के प्रावधानों पर स्पष्ट जानकारी जरूरी है। भवनों के नीचे होना अपने आप में असुरक्षा का प्रमाण नहीं है; सुरक्षा परियोजना के तकनीकी डिजाइन, निर्धारित मानकों और संबंधित मंजूरियों पर निर्भर करती है।

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रोपवे शुरू होने से काशी को आधुनिक परिवहन का नया विकल्प मिलने की उम्मीद है। अब शेष निर्माण कार्य, तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा संबंधी मंजूरियों के बाद इसके संचालन का इंतजार है।

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Shiv murti

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