रथयात्रा मेले के अंतिम दिन श्वेत श्रृंगार में विराजे भगवान जगन्नाथ
रथ स्पर्श के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब
वाराणसी (जनवार्ता)। विश्वप्रसिद्ध तीन दिवसीय रथयात्रा मेले के अंतिम दिन शनिवार को काशी में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु रथयात्रा मेला क्षेत्र पहुंचकर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के दर्शन एवं रथ स्पर्श के लिए उमड़ पड़े। श्रद्धालुओं ने परिवार, समाज और राष्ट्र के सुख-समृद्धि तथा सर्वमंगल की कामना की।

अंतिम दिन भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र का श्वेत वस्त्र एवं श्वेत पुष्पों से भव्य श्रृंगार किया गया। प्रातः पांच बजे मंदिर के पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से श्रृंगार कराया। रथ को गुलाब, बेला की कलियों, हरी पत्तियों और सफेद पुष्पों से आकर्षक ढंग से सजाया गया, जिसकी दिव्य छटा ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सुबह छह से आठ बजे तक भजन मंडलियों ने भक्ति संगीत की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा। इसके बाद भगवान को मूंग-चना, पेड़ा, गुड़, खांड़सारी तथा तुलसी मिश्रित नींबू शरबत का भोग अर्पित किया गया। दोपहर में पूड़ी, कटहल की सब्जी, दही, सूजी का हलवा, मालपुआ, पंचमेल मिठाई और कटहल के अचार सहित विशेष भोग लगाया गया।
परंपरा के अनुसार दोपहर में भगवान के रथ को खींचकर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के समीप तक ले जाया गया। भोग के बाद रथ का पट बंद किया गया। शाम को पुनः श्रृंगार, आरती और दर्शन-पूजन का क्रम देर रात तक जारी रहा।
मेले में धार्मिक आस्था के साथ उत्सव का माहौल भी देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने दर्शन के बाद मेले में लगी दुकानों से खरीदारी की, जबकि बच्चों और महिलाओं ने झूले, चरखी एवं अन्य मनोरंजन के साधनों का आनंद लिया। खाद्य स्टालों पर भी दिनभर लोगों की भीड़ रही।
मेले की सुरक्षा के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे। भेलूपुर एसीपी, थाना प्रभारी समेत पुलिस अधिकारी लगातार मेला क्षेत्र का निरीक्षण करते रहे। पूरे क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से की गई।
रथयात्रा मेले के समापन के बाद रविवार तड़के भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की विशेष आरती होगी। इसके उपरांत विग्रहों को अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर ले जाया जाएगा। वहीं, भगवान के विशाल रथ को सिगरा स्थित रथशाला में सुरक्षित रखा जाएगा, जहां अगले वर्ष की रथयात्रा तक उसका संरक्षण किया जाएगा।

