मेरा अंतःकरण साफ, मै निर्दोष हूँ: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
वाराणसी (जनवार्ता)। ज्योतिषपीठ (ज्योतिर्मठ) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉस्को एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला माघ मेले और प्रयागराज में आयोजित शिविरों से जुड़ा होने के कारण धार्मिक-सामाजिक हलकों में तेजी से चर्चा में है।

प्रयागराज की विशेष पॉस्को अदालत (एडीजे/स्पेशल जज विनोद कुमार चौरसिया) ने शुक्रवार को शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी (शकुंभरी पीठाधीश्वर और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य) की याचिका पर पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। अदालत ने पीड़ित बच्चों के बयान, शपथ-पत्र और उपलब्ध सबूतों पर गौर किया।
एफआईआर में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी (मुकुंदानंद गिरी) और 2-3 अज्ञात व्यक्तियों पर पॉस्को एक्ट की धाराएं 3, 4(2), 5, 6, 16, 17 तथा बीएनएस की धारा 351(2) सहित अन्य प्रावधान लगाए गए हैं। आरोप है कि ‘गुरु सेवा’ के बहाने दो बच्चों (एक नाबालिग और एक बालिग) के साथ यौन शोषण किया गया। घटनाएं प्रयागराज के आश्रम/शिविर और माघ मेले के दौरान बताई गई हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए आरोपों को पूरी तरह निराधार और सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा, “मेरा अंतःकरण साफ है, मैं निर्दोष हूं। ईश्वर सब देख रहा है। झूठ अंत में सामने आ जाता है। आरोपित बच्चे कभी हमारे गुरुकुल में नहीं आए। माघ मेले में हर जगह सीसीटीवी थे, रिकॉर्ड से सबूत साफ होंगे।” उन्होंने पुलिस जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही और पूछा, “अगर कोई सीडी/वीडियो है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?”
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में बच्चों को पेश कर उनके बयान दर्ज कराए। पुलिस अब डिजिटल सबूतों की फॉरेंसिक जांच कर रही है। प्रयागराज पुलिस की टीम वाराणसी पहुंची है और पूछताछ की जा रही है ।

