प्रसूता की मौत पर ओरियाना हॉस्पिटल में हंगामा, डेढ़ लाख रुपये वसूलने का आरोप
प्रज्ञा हॉस्पिटल में प्रसव के बाद बिगड़ी तबीयत
वाराणसी। भेलूपुर थाना क्षेत्र के रविंद्रपुरी स्थित ओरियाना हॉस्पिटल में बुधवार को 28 वर्षीय प्रसूता नीलम पटेल की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि प्रसूता के इलाज के नाम पर करीब डेढ़ लाख रुपये लिए गए। हालांकि, इलाज में लापरवाही के आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

परिजनों के मुताबिक, नीलम पटेल को प्रसव के लिए प्रज्ञा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां ऑपरेशन से बच्चे का जन्म हुआ। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के बाद नीलम की तबीयत बिगड़ गई। रात में दर्द की शिकायत पर इंजेक्शन दिए जाने के बाद उनका रक्तचाप बढ़ने लगा और घबराहट होने लगी। हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर उपचार के लिए ओरियाना हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया।
परिजनों के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 4:30 बजे नीलम को एंबुलेंस से ओरियाना हॉस्पिटल पहुंचाया गया। वहां जांच के बाद परिवार के लोगों को नीचे इंतजार करने के लिए कहा गया। परिजनों का दावा है कि वे करीब डेढ़ घंटे तक नीलम की हालत में सुधार होने की उम्मीद में इंतजार करते रहे। बाद में उन्हें नीलम की मौत होने की जानकारी दी गई।
बिल को लेकर भी विवाद
प्रसूता की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि रातभर इलाज के नाम पर करीब डेढ़ लाख रुपये वसूले गए। विरोध करने पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से बिल माफ करने की बात कही गई। परिजनों का यह भी दावा है कि उन्हें बताया गया कि मरीज रात में ही मृत अवस्था में मिली थी। इसको लेकर अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच विवाद की स्थिति बन गई।
पुलिस ने संभाली स्थिति, जांच जारी
हंगामे की सूचना पर भेलूपुर थाना प्रभारी दुर्गा प्रसाद पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाकर शांत कराया। परिजन प्रज्ञा हॉस्पिटल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, ओरियाना हॉस्पिटल प्रशासन का कहना है कि नीलम को अस्पताल लाए जाने के समय उनकी हालत गंभीर थी और चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
पुलिस के अनुसार, परिजनों की शिकायत की जांच की जा रही है। जांच के तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रसूता की मौत के कारणों और इलाज में कथित लापरवाही के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

