न्यूक्लियर साइट पर इज़राइली हमला
मध्य पूर्व में ईरान-इज़राइल संघर्ष और तेज
नई दिल्ली (जनवार्ता)। मध्य पूर्व में जारी ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच युद्ध ने नया मोड़ ले लिया है। इज़राइल ने ईरान की राजधानी तेहरान के निकट तालेघान (Taleghan) न्यूक्लियर कंपाउंड पर हमला किया, जिससे जोरदार धमाके हुए और शहर के पश्चिमी हिस्से में काला धुआं उठता दिखा। इज़राइली सेना ने दावा किया कि यह साइट परमाणु हथियार विकसित करने से जुड़ी महत्वपूर्ण क्षमताओं वाला ठिकाना था, जिसे हाल ही में पुनर्निर्मित किया गया था।

यह हमला 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय प्रभाव को कमजोर करना बताया जा रहा है। इज़राइल ने पुष्टि की कि तालेघान कंपाउंड पर हमले में वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने सटीक हमले किए, और सैटेलाइट तस्वीरों में तीन बड़े गड्ढे दिखाई दिए हैं।
ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चेतावनी दी कि यदि अमेरिका या इज़राइल ने फारस की खाड़ी में स्थित ईरानी द्वीपों पर हमला किया तो तेहरान “सभी संयम” छोड़ देगा। उन्होंने कहा, “हमलावरों का खून फारस की खाड़ी को लाल कर देगा।” रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने खर्ग द्वीप (Kharg Island) पर कब्जे की संभावना पर विचार किया है, जो ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र है।
फारस की खाड़ी में तनाव बढ़ने के साथ ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने उत्तरी हिस्से में एक जहाज को निशाना बनाया। ईरान का कहना है कि मार्शल द्वीपसमूह का झंडा लगे इस जहाज पर अमेरिका का नियंत्रण था। हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। खाड़ी में जहाजों पर हमलों से तेल परिवहन प्रभावित हुआ है, और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ मजबूत होने से वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी कमी आई है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, कच्चे तेल का उत्पादन कम से कम 80 लाख बैरल प्रतिदिन घट गया है।
इसी बीच, इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में एरबिल स्थित इतालवी सैन्य ठिकाने कैंप सिंगारा पर हमला हुआ। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने इसकी कड़ी निंदा की। हमले से बेस को नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई सैनिक घायल नहीं हुआ। इटली ने अपने सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यह युद्ध अब 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें दोनों पक्षों से लगातार हमले हो रहे हैं। वैश्विक तेल बाजार पर इसका गहरा असर पड़ रहा है, और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं कि आगे क्या होता है।

