ब्रेकिंग: रिश्वत मांगने घर पहुंचा SOC का पेशकार, रकम न देने पर उलट दिया फैसला!
वाराणसी(जनवार्ता)। चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पदेन बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी (SOC) पवन कुमार सिन्धु के पेशकार पर रिश्वत मांगने के लिए सीधे प्रार्थी के घर पहुंचने का आरोप लगा है। पीड़ित द्वारा रकम देने से इनकार करने पर सिर्फ 24 घंटे के भीतर फैसला पलट देने की बात सामने आई है।

शिकायतकर्ता छेदीलाल दीक्षित ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि 7 अप्रैल 2026 सुबह 9 बजे SOC का पेशकार उसके घर पहुंचा और ₹5 लाख की मांग करते हुए कहा कि पैसा देने पर फैसला उसके पक्ष में करा दिया जाएगा।
लेकिन जैसे ही आरोपी ने रिश्वत देने से मना किया, अगले ही दिन 8 अप्रैल 2026 को उसके खिलाफ आदेश पारित कर दिया गया।
न्यायिक आदेशों की खुली अनदेखी:
मामला पुराने वादों (संख्या 194, 195, 754-756) से जुड़ा है, जिन पर अपील और फिर निगरानी के बाद 1 जुलाई 2025 को उप संचालक चकबंदी न्यायालय ने पूर्व आदेश को निरस्त कर पुनः सुनवाई के निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद आरोप है कि SOC पवन कुमार सिन्धु ने उच्च न्यायालयीय निर्देशों को दरकिनार करते हुए पुराने आदेश की ही कॉपी दोहराकर नया फैसला सुना दिया।
डिजिटल जांच की मांग:
भुक्तभोगी ने मांग की है कि पेशकार की मोबाइल लोकेशन
कॉल डिटेल्स (CDR) की जांच कराई जाए, जिससे यह साबित हो सके कि वह रिश्वत मांगने घर पहुंचा था।
अकूत संपत्ति पर भी सवाल:
शिकायत में यह भी कहा गया है कि
SOC पवन कुमार सिन्धु और उनके करीबी रिश्तेदारों की आय से अधिक संपत्ति की गोपनीय जांच कराई जाए।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभाग में बिना “नाजायज धन” लिए कोई भी आदेश पारित नहीं किया जाता और यह भ्रष्टाचार अब आम चर्चा का विषय बन चुका है।
मुख्यमंत्री से सीधी अपील:
पीड़ित ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पूरे प्रकरण की गोपनीय जांच कराकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि चकबंदी विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो सके।
बड़ा सवाल यह है कि क्या रिश्वत न देने की कीमत अब न्यायिक फैसलों से चुकानी पड़ेगी? वाराणसी चकबंदी विभाग का यह मामला पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

