काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में प्राचीन भारतीय मुद्राओं पर सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में प्राचीन भारतीय मुद्राओं पर सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

वाराणसी  (जनवार्ता): प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) द्वारा “भारतीय ज्ञान परंपरा  के परिप्रेक्ष्य में प्राचीन भारतीय मुद्राएँ: स्रोत, लिपि एवं टकसाल तकनीक” विषय पर सात दिवसीय राष्ट्रीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला का शुभारंभ गुरुवार को कला संकाय के प्रेमचंद सभागार में किया गया। यह कार्यशाला महान इतिहासकार एवं मुद्राविद् स्वर्गीय प्रो. ए. के. नारायण की जन्मशती के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है।

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कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरागत दीप प्रज्वलन, महामना पं. मदन मोहन मालवीय एवं प्रो. ए. के. नारायण की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण तथा प्रदर्शन कला संकाय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत कुलगीत के साथ हुआ।

विभागाध्यक्ष प्रो. एम. पी. अहीरवार ने स्वागत भाषण में मुद्राशास्त्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जन्मशती वर्ष का सातवाँ शैक्षणिक आयोजन है। कार्यशाला संयोजिका प्रो. मीनाक्षी सिंह ने उद्देश्यों एवं कार्यक्रम की रूपरेखा बताई।

मुख्य अतिथि प्रो. कमल शील (पूर्व रेक्टर, बीएचयू) ने अपने पिता स्वर्गीय प्रो. ए. के. नारायण के योगदान को याद करते हुए ऐसे शैक्षणिक आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि प्रो. पी. एन. सिंह (अध्यक्ष, भारतीय मुद्रा परिषद्) ने विभाग की शोध गतिविधियों की सराहना की।

अमितेश्वर झा (पूर्व निदेशक, आईआईआरएनएस, नासिक) ने मुद्राशास्त्र के विकास और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग पर व्याख्यान दिया, जबकि मनीष वर्मा (क्यूरेटर, हिंदुजा फाउंडेशन) ने अपने संग्रह के संरक्षण कार्य की जानकारी दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने की। उन्होंने निम्न मूल्यवर्ग की मुद्रा के अवमूल्यन की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए छात्रों को मुद्रा इतिहास के गहन अध्ययन के लिए प्रेरित किया।

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दोपहर के द्वितीय सत्र की अध्यक्षता प्रो. ओ. एन. सिंह ने की, जिसमें  अमितेश्वर झा ने मुद्राशास्त्र के विविध आयामों पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग के सहयोग से एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया, जिसमें पुरातात्विक एवं मुद्राशास्त्रीय धरोहर से संबंधित चित्रात्मक पैनल प्रदर्शित किए गए।

यह कार्यशाला 22 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें देशभर से आए प्रतिभागियों के लिए व्याख्यान, हैंड्स-ऑन सत्र और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।

Shiv murti

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