SC का फैसला;विवाहित और अविवाहित सभी महिलाओं को अबॉर्शन का अधिकार

SC का फैसला;विवाहित और अविवाहित सभी महिलाओं को अबॉर्शन का अधिकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज महिलाओं के प्रति बड़ा फैसला सुनाया है। जिसमें कहा गया है कि हर महिला सुरक्षित और कानूनी गर्भपात की हकदार चाहे वो विवाहित हो या अविवाहित। सभी महिलाओं को अबॉर्शन कराने का पूरा हक है चाहें उनकी वैवाहिक स्थिती कुछ भी हों। इसके साथ ही मैरिटल रेप पर कोर्ट ने कहा वैवाहिक महिला पर पति का जबरन हमला बलात्कार माना जा सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट में बड़ा बदलाव किया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सभी महिलाएं सुरक्षित और कानूनी गर्भपात की हकदार हैं, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि भारत में सभी महिलाओं को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत गर्भपात चुनने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि भारत में गर्भपात कानून के तहत विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच कोई भेद नहीं किया जाएगा। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि अबॉर्शन के नजरिए से एक विवाहित महिला की जबरन गर्भावस्था को ”वैवाहिक बलात्कार” की श्रेणी में माना जा सकता हैं।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा,”बलात्कार का मतलब है कि बिना सहमति के संभोग और ‘इंटिमेट पार्टनर हिंसा’ समाज की एक वास्तविकता है। ऐसे में भी महिला जबरदस्ती प्रेग्नेंट हो सकती है। रेप का मतलब मैरिटल रेप के तौर पर भी समझा जाना चाहिए। एमटीपी एक्ट महिला को जबरदस्ती गर्भधारण से बचाने के लिए जरूरी है। अगर कोई भी महिला बिना मर्जी के गर्भवती होती है तो उसे भी बलात्कार ही माना जाएगा।”

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भारत में गर्भपात के अधिकार
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक,अब विवाहित और अविवाहित दोनो ही कंडिशन में महिलाएं 24 हफ्तों के अंदर कानूनी तौर पर सेफ अबॉर्शन करवा सकती हैं। उन पर जबरन गर्भ धारण करने का दवाब नहीं बनाया जा सकता है।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते हुए कहा,
“नियम 3बी(सी) को केवल विवाहित महिलाओं के लिए समझा जाता है, ऐसे में यह इस रूढ़िवादिता को कायम रखेगा कि केवल विवाहित महिलाएं ही यौन गतिविधियों में लिप्त होती हैं। हालांकि यह संवैधानिक रूप से टिकाऊ नहीं है। विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच ऐसे भेद को कायम नहीं रखा जा सकता हैं। महिलाओं को इन अधिकारों के लिए स्वायत्तता और मुक्त होना चाहिए।”

कोर्ट ने कहा,
“प्रजनन स्वायत्तता का अधिकार अविवाहित महिलाओं को विवाहित महिलाओं के समान ही अधिकार देते हैं।”
बता दें कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत महिलाओं को 20 से 24 हफ्तों के अंदर कानून के मुताबिक अबॉर्शन कराने की इजाजत हैं। इस एक्ट के तहत अविवाहित महिलाएं भी समान रूप से गर्भपात कराने की पूरी हकदार हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से यह बड़ा अधिकार महिलाओं को दिया गया हैं।

Shiv murti

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