लखनऊ में 870 करोड़ के तीन बड़े शहरी विकास प्रस्ताव तैयार
अर्बन प्लाजा, अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज और कूड़े से बिजली प्लांट शामिल
लखनऊ, (जनवार्ता):
केंद्र सरकार की अर्बन चैलेंज फंड योजना के तहत नगर निगम ने करीब 870 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन अहम परियोजनाओं का प्रस्ताव तैयार कर नगर विकास विभाग को भेज दिया है। इन प्रस्तावों को शुक्रवार को विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है।
पहले केवल लालबाग स्थित बालाकदर परिसर में अर्बन प्लाजा निर्माण की योजना थी, लेकिन अब इसमें दो और परियोजनाएं—शूटिंग रेंज का आधुनिकीकरण और कूड़े से बिजली उत्पादन प्लांट—भी शामिल कर ली गई हैं। नगर निगम के मुख्य अभियंता (सिविल) महेश चंद्र वर्मा के अनुसार, इन योजनाओं को अर्बन चैलेंज फंड के तहत लागू करने की तैयारी की जा रही है और स्वीकृति मिलने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी।
मोहान रोड स्थित शिवरी क्षेत्र में कूड़े से बिजली बनाने के लिए 600 करोड़ रुपये की योजना प्रस्तावित है। शहर से प्रतिदिन लगभग 1800 से 1900 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, लेकिन मिश्रित कचरे के कारण ऊर्जा उत्पादन में दिक्कत आती है। अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीक के जरिए कचरे की छंटाई कर इस समस्या का समाधान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1998 में भी इस तरह की योजना शुरू की गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी थी।
वहीं, सरोजनीनगर के अमौसी क्षेत्र में करीब 41.60 एकड़ में फैली शूटिंग रेंज को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस परियोजना के तहत 20 एकड़ में अत्याधुनिक शूटिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जबकि शेष भूमि पर टाउनशिप, पांच प्लॉट और एक होटल विकसित करने की योजना है। इस कार्य के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
इसके अलावा लालबाग स्थित नगर निगम के बालाकदर परिसर में 4750 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में 70 करोड़ रुपये की लागत से चार मंजिला अर्बन प्लाजा बनाने की योजना है। इसमें कार्यालयों के साथ व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही आधुनिक पार्किंग व्यवस्था और अन्य सुविधाओं के माध्यम से राजस्व बढ़ाने की योजना भी बनाई गई है।
अर्बन चैलेंज फंड के तहत परियोजनाओं की लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा दिया जाएगा, जबकि 50 प्रतिशत राशि बाजार, नगर निगम बांड, ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के जरिए जुटाई जाएगी। शेष 25 प्रतिशत राशि स्थानीय निकाय को अपने संसाधनों से वहन करनी होगी।
नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बताया कि हाल ही में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद इन प्रस्तावों को तेजी से तैयार किया गया है। अब इनकी स्वीकृति का इंतजार है, जिसके बाद शहर के शहरी विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।


