वाराणसी में नीट ‘चीट’ नेटवर्क का बड़ा खुलासा, 2021 का मामला चार साल बाद भी अधर में
वाराणसी (जनवार्ता) |
नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और सॉल्वर गैंग से जुड़े मामलों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में नीट-2026 परीक्षा रद्द होने के बाद अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच 2021 में वाराणसी में सामने आया एक बड़ा सॉल्वर नेटवर्क मामला फिर चर्चा में आ गया है, जो चार साल बाद भी किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंच सका है।
सितंबर 2021 में वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र स्थित सरायमोहाना परीक्षा केंद्र पर नीट-यूजी के दौरान सॉल्वर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ था। उस समय क्राइम ब्रांच और सारनाथ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पटना की जूली कुमारी को गिरफ्तार किया था, जो कथित तौर पर त्रिपुरा की अभ्यर्थी हिना विश्वास की जगह परीक्षा दे रही थी। इसी कार्रवाई में जूली कुमारी की मां बबिता देवी को भी मौके से पकड़ लिया गया था। इस घटना के बाद देशभर में फैले एक संगठित परीक्षा धांधली नेटवर्क का खुलासा हुआ था।
इसके बाद नवंबर 2021 में इस नेटवर्क के कथित सरगना नीलेश सिंह उर्फ पीके को गिरफ्तार किया गया। वह छपरा का रहने वाला था और पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी में रहकर कथित रूप से लग्जरी जीवन जी रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि वह खुद को डॉक्टर बताता था और उसके पास कई महंगी गाड़ियां थीं। बताया गया कि उसका नेटवर्क यूपी, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों तक फैला हुआ था।
इस मामले में कुल 42 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें कई कथित मास्टरमाइंड और सहयोगी शामिल थे। सभी आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट सहित गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। हालांकि वर्तमान में सरगना सहित सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं। सूत्रों के अनुसार 13 आरोपियों के खिलाफ वारंट भी जारी हुए, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
शुरुआत में यह केस सारनाथ थाने में दर्ज हुआ था, जिसके बाद इसे चौबेपुर थाने और फिर क्राइम ब्रांच की विवेचना सेल को ट्रांसफर किया गया। लेकिन जांच अधिकारियों के रिटायरमेंट और मॉनिटरिंग की कमी के कारण मामले की प्रगति लगभग ठप पड़ गई है।
इस पूरे नेटवर्क का खुलासा करने वाली टीम को 2022 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इस कार्रवाई में उप निरीक्षक सूरज कुमार तिवारी और तत्कालीन सर्विलांस सेल प्रभारी निरीक्षक अंजनी कुमार पांडेय की अहम भूमिका रही थी।
नोट: नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर यह मामला आज भी जांच और प्रशासनिक प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है।


