बीजेपी संगठन में यूपी की बढ़ेगी ताकत?
लखनऊ (जनवार्ता)। भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पश्चिम बंगाल और असम समेत कई राज्यों में चुनावी सफलता के बाद अब पार्टी का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश पर माना जा रहा है। इसी रणनीति के तहत संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बड़े बदलाव की तैयारी की चर्चा है।
हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में छह नए मंत्रियों को शामिल किया गया, जबकि दो मंत्रियों को प्रमोशन दिया गया। इसके बाद प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में भेजने और युवा नेताओं को प्रदेश संगठन में आगे लाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ संगठन में बदलाव को लेकर बैठक की है। प्रदेश स्तर पर भी संभावित नामों की सूची तैयार किए जाने की चर्चा है।
सूत्रों के मुताबिक टीम योगी के 4 से 5 नेताओं को प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। इनमें कुछ ऐसे मंत्री भी शामिल बताए जा रहे हैं जिनकी प्रशासनिक रिपोर्ट बहुत बेहतर नहीं मानी गई, लेकिन संगठन और जातीय समीकरण के लिहाज से उन्हें उपयोगी माना जा रहा है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किए जाने वाले संभावित नेताओं में डॉ. महेंद्र सिंह, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, राज्यसभा सांसद अमर पाल मौर्य, अशोक कटारिया, एमएलसी अनूप गुप्ता, संतोष सिंह, विजय बहादुर पाठक, अश्विनी त्यागी और पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में बताए जा रहे हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में भी बदलाव की अटकलें हैं। चर्चा है कि राष्ट्रीय महासचिव पद पर अरुण सिंह या मोहन दास अग्रवाल में से किसी एक को नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में भी नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष पद पर भी नए विकल्प तलाशे जाने की चर्चा है।
भाजपा प्रदेश संगठन में होने वाले बदलावों में जातीय संतुलन को सबसे अहम माना जा रहा है। पश्चिम क्षेत्र में गुर्जर और वैश्य समाज, अवध क्षेत्र में ब्राह्मण, ब्रज क्षेत्र में शाक्य और लोधी समाज के नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा है। वहीं गोरखपुर क्षेत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहमति को अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा संगठन में यह संभावित बदलाव 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा हैं। पार्टी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

