मटर की उन्नत किस्म ‘काशी नंदिनी’ का नैफको को लाइसेंस हस्तांतरण*

मटर की उन्नत किस्म ‘काशी नंदिनी’ का नैफको को लाइसेंस हस्तांतरण*

वाराणसी (जनवार्ता) । आराजी लाइन विकासखंड क्षेत्र के शाहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी द्वारा विकसित मटर की उन्नत एवं उच्च उत्पादक किस्म ‘काशी नंदिनी’ के व्यावसायीकरण एवं व्यापक प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त करते हुए नेशनल एग्रो फार्मिंग मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (नैफको), नई दिल्ली के साथ लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी सहभागिता को सुदृढ़ करने तथा गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।आईसीएआर-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान की ओर से संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि नैफको की ओर से समित सक्सेना ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

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इस अवसर पर डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि संस्थान किसानों की आय वृद्धि, पोषण सुरक्षा एवं टिकाऊ कृषि विकास को ध्यान में रखते हुए उच्च उत्पादकता वाली एवं किसान हितैषी सब्जी किस्मों के विकास हेतु निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि निजी एवं सहकारी संस्थाओं के माध्यम से उन्नत किस्मों का लाइसेंस हस्तांतरण गुणवत्तायुक्त बीजों के तीव्र उत्पादन, व्यापक वितरण तथा किसानों तक समय पर पहुँच सुनिश्चित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की साझेदारियाँ अनुसंधान संस्थानों एवं कृषकों के बीच तकनीकी सेतु का कार्य करती हैं तथा कृषि आधारित उद्यमिता को नई दिशा प्रदान करती हैं।

मटर की किस्म ‘काशी नंदिनी’ एक शीघ्र परिपक्व होने वाली उन्नत किस्म है। इस किस्म में प्रति पौधा लगभग 7–8 फलियाँ लगती हैं तथा फलियों की लंबाई 8–9 सेंटीमीटर होती है। फलियाँ अच्छी तरह भरी हुई होती हैं जिनमें लगभग 8–9 दाने पाए जाते हैं तथा इसका शेलिंग प्रतिशत लगभग 47–48 प्रतिशत है। इस किस्म की उत्पादन क्षमता लगभग 110–120 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पाई गई है। लाइसेंस हस्ताक्षर समारोह में विभागाध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डी. पी. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह, डॉ. त्रिभुवन चौबे, डॉ. सुदर्शन मौर्य तथा डॉ. ज्योति देवी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का समन्वयन वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. इन्दीवर प्रसाद द्वारा किया गया। उन्होंने संस्थान की प्रौद्योगिकी प्रबंधन इकाई (आईटीएमयू) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह इकाई संस्थान द्वारा विकसित नवाचारों एवं प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण, लाइसेंसिंग एवं प्रसार हेतु सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। कार्यक्रम का समापन किसानों, बीज उत्पादकों एवं कृषि क्षेत्र के व्यापक हित में उन्नत सब्जी किस्मों एवं प्रौद्योगिकियों के प्रसार को बढ़ावा देने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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Shiv murti

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