कोटवा गांव: प्रधानमंत्री के क्षेत्र में 21वीं सदी का दर्दनाक सच
वाराणसी (जनवार्ता): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर लोहता क्षेत्र के कोटवा गांव में विकास की कहानी और हकीकत के बीच गहरी खाई है। जहां देशभर में गांवों को आधुनिक बनाने की बात की जाती है, वहां यहां के बहुसंख्यक आबादी वाले इस गांव के ग्रामीण आज भी पगडंडीनुमा टूटे-फूटे रास्तों पर गुजरने को मजबूर हैं।


गांव में मुख्य मार्ग से अंदर तक जाने वाली सड़कें ऐसी हैं मानो किसी युद्धक्षेत्र से गुजर रहे हों। वर्षों से कोई ठोस मरम्मत नहीं हुई। बारिश में तो इन रास्तों पर चलना जानलेवा हो जाता है।

“हर घर जल” भी सफेद हाथी
साबित
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स्थानीय वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार सिंह ‘गुड्डू’ ने दुख व्यक्त करते हुए कहा,
“हमारा गांव मुख्यालय से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का यहां नामोनिशान नहीं है। सरकार की ‘हर घर जल’ योजना यहां सिर्फ कागजों में है। न तो नियमित पानी आता है, न ही सड़कें ठीक हैं। प्रधानमंत्री जी बार-बार कहते हैं कि गांवों के विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं है, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि इस धन का दुरुपयोग कर खुद को अरबपति बना रहे हैं।”
अल्पसंख्यक परिवारों का पलायन
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सबसे चिंताजनक बात यह है कि गांव के कई अल्पसंख्यक परिवार मूलभूत सुविधाओं के अभाव में मजबूरन गांव छोड़ चुके हैं। कई घरों में अब ताले लटक रहे हैं। जो परिवार बचे हैं, वे रोजमर्रा की जिंदगी में भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।
अजय सिंह गुड्डू आगे कहते हैं,
“प्रधानमंत्री का गोद लिया हुआ गांव ककरहिया पास में है, लेकिन कोटवा जैसे गांव में कोई बड़ा सरकारी अधिकारी कभी योजना लेकर नहीं आता। यहां विकास के नाम पर सिर्फ घोटाले हो रहे हैं।”
जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप
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स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि विकास की योजनाओं का पैसा जनप्रतिनिधि अपनी जेबों में भर रहे हैं। अशिक्षित ग्रामीणों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए वे लगातार अमीर हो रहे हैं, जबकि गांव पिछड़ता जा रहा है।
कोटवा गांव प्रधानमंत्री के क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यहां की नई पीढ़ी भी हताश है।
सवाल उठता है:
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क्या प्रधानमंत्री के अपने क्षेत्र में भी विकास सिर्फ भाषणों तक सीमित है? या फिर स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार ने सारी योजनाओं को निगल लिया है?
कोटवा के ग्रामीण अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी आवाज ऊपर तक पहुंचेगी और उनके गांव को भी 21वीं सदी की सच्ची सुविधाएं मिलेंगी।

