बीएचयू भर्ती जांच से बढ़ी हलचल, 28 लोग जांच एजेंसियों के रडार पर

बीएचयू भर्ती जांच से बढ़ी हलचल, 28 लोग जांच एजेंसियों के रडार पर

वाराणसी (जनवार्ता)  । काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में गैर-शैक्षणिक पदों पर हुई भर्ती को लेकर चल रही कथित गोपनीय जांच ने विश्वविद्यालय और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक पहुंची शिकायत के बाद केंद्रीय स्तर पर शुरू हुई पड़ताल में भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की आर्थिक गतिविधियों, बैंक खातों तथा आपसी संपर्कों की गहन जांच की गई है।

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बताया जा रहा है कि करीब दो महीने तक चली इस जांच को पूरी तरह गोपनीय रखा गया। इस दौरान जांच एजेंसियों ने कई अभ्यर्थियों और उनके परिजनों के वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की। वाराणसी के एक अभ्यर्थी से जुड़े मामले में भी आर्थिक लेन-देन के आरोपों की जांच किए जाने की चर्चा है। वहीं सर सुंदरलाल अस्पताल के आयुर्वेद संकाय से जुड़े एक कर्मचारी के परिवार के सदस्य की भर्ती को लेकर भी एजेंसियों ने वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले हैं।


सूत्रों का दावा है कि पहाड़िया क्षेत्र के एक सेवानिवृत्त दूरसंचार कर्मी की भूमिका भी जांच के दायरे में रही। आरोप है कि कुछ भर्तियों में प्रभाव का इस्तेमाल कर आर्थिक लेन-देन कराया गया। हालांकि इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


जांच का दायरा पूर्वांचल के अन्य जिलों तक भी पहुंचा है। मऊ और आजमगढ़ के कई अभ्यर्थियों तथा उनके परिवारों की आर्थिक गतिविधियों की समीक्षा किए जाने की चर्चा है। वहीं चंदौली निवासी केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का नाम भी जांच में सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि उन्होंने अपने रिश्तेदार की नियुक्ति के लिए पैरवी की थी। एजेंसियों ने ऐसे मामलों में बैंक खातों के साथ मोबाइल संपर्कों की भी पड़ताल की है।

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सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में शामिल कुछ अभ्यर्थी नौकरी जॉइन कर चुके हैं, जबकि कुछ की नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि कई मामलों में नियुक्ति संबंधी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं।


बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियों ने कुल 28 लोगों को संदिग्ध मानते हुए उनकी भूमिका की समीक्षा की है। रिपोर्ट पिछले महीने पीएमओ को सौंपे जाने की चर्चा है। इसी के साथ जून माह में कुछ मामलों में एफआईआर दर्ज होने की अटकलें भी तेज हो गई हैं, हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
उधर हाल में हुई बीएचयू कार्यकारिणी समिति की बैठक में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने पर जोर दिया गया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि किसी भी मामले में आर्थिक लेन-देन या अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित सभी पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

Shiv murti

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