झरिया में प्रस्तावित परियोजना की जनसुनवाई का ग्रामीणों ने किया विरोध, पर्यावरण संरक्षण की उठाई मांग
सोनभद्र (जनवार्त)। विश्व पर्यावरण पखवाड़ा के अंतर्गत झरिया गांव में आयोजित जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों, आदिवासियों, वनवासियों एवं स्थानीय नागरिकों ने प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना का विरोध किया।


प्रदर्शनकारियों का कहना था कि क्षेत्र के प्राकृतिक वन, पहाड़, चट्टानें और जलस्रोत पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं तथा किसी भी ऐसी परियोजना को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जिससे इनके अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जनसुनवाई के दौरान परियोजना के पक्ष में सहमति प्राप्त करने के लिए कुछ लोगों से पंजीकरण के नाम पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए, जबकि अधिकांश उपस्थित लोगों ने परियोजना का समर्थन नहीं किया। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी निभाने वाले विभागों को प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि झरिया सहित सोन नदी के दोनों किनारों पर स्थित चकरिया, सलटगवां, बरहमोरी, ससनई, महुला, छिड़का, कन्हौरा, पकरिहवा, कोडईल, पटवन, सोनाटोला, लालगंज, सलखन, रुदौली, बेलच, मकरीबारी, नौडीहा, हर्रा, बेलौरा, खोखा और करहिया जैसे कई गांव पहले से प्रदूषण की समस्या का सामना कर रहे हैं।
विरोधकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ओबरा क्षेत्र से निकलने वाली राख और औद्योगिक अपशिष्टों के कारण सोन नदी और आसपास का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य तथा जैव विविधता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
उन्होंने मांग की कि नई परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले मौजूदा प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए। जनसुनवाई के दौरान हजारों ग्रामीणों एवं आदिवासी समुदाय के लोगों ने अपने विरोध को मुखर रूप से दर्ज कराया।

