गाजीपुर : टेंडर घोटाले की विवेचना में लापरवाही पर दो दरोगा निलंबित
वाराणसी (जनवार्ता) । सरकारी निविदा प्रक्रिया में सात निजी फर्मों द्वारा कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े मामले की विवेचना में गंभीर लापरवाही बरतने पर गाजीपुर कोतवाली के दो उपनिरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) वाराणसी परिक्षेत्र वैभव कृष्ण के निर्देश पर की गई।

डीआईजी ने 3 जुलाई 2026 को लंबित एवं संवेदनशील मामलों की समीक्षा के दौरान थाना कोतवाली गाजीपुर में दर्ज मुकदमा संख्या 132/2025 की विवेचना का परीक्षण किया। जांच में सामने आया कि तकनीकी अनुदेशकों की नियुक्ति के लिए पोर्टल पर जारी सरकारी निविदा में सात निजी फर्मों ने कथित रूप से फर्जी एफडीआर, डिमांड ड्राफ्ट और अन्य वित्तीय दस्तावेज लगाकर भागीदारी की थी।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि विवेचकों ने फर्जी दस्तावेजों जैसे गंभीर आरोपों की समुचित जांच नहीं की, बिना ठोस आधार के सातों फर्मों को क्लीन चिट दे दी और प्रथम दृष्टया अपराध स्पष्ट होने के बावजूद अंतिम रिपोर्ट लगाकर मुकदमा बंद करने का प्रयास किया।
प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर उपनिरीक्षक रोहित कुमार और जितेंद्र कुमार उपाध्याय को निलंबित कर पुलिस लाइन गाजीपुर से संबद्ध कर दिया गया है। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
डीआईजी के निर्देश पर मुकदमे की विवेचना थाना स्तर से हटाकर क्षेत्राधिकारी नगर, गाजीपुर को सौंप दी गई है। नए विवेचक को 30 दिनों के भीतर निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण विवेचना पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
वाराणसी परिक्षेत्र पुलिस ने स्पष्ट किया है कि विवेचना में शिथिलता बरतने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ भविष्य में भी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

