मीट, मछली और मांस विक्रेताओं को शहर से बाहर करने के प्रस्ताव का विरोध तेज, नगर आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी (जनवार्ता)। नगर निगम सदन में मछली, मीट एवं मांस विक्रेताओं को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को कांग्रेस पार्षद दल, साँझा संस्कृति मंच, एपवा और आम आदमी पार्टी सहित विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह प्रस्ताव गरीब व्यापारियों की आजीविका, संवैधानिक अधिकारों और वाराणसी की साझा सांस्कृतिक विरासत के विपरीत है। उनका कहना था कि यदि लाइसेंसधारी दुकानों से धार्मिक नगरी की गरिमा या पर्यटकों को कोई समस्या नहीं है, तो केवल बिना लाइसेंस वाले विक्रेताओं को समस्या का कारण बताना उचित नहीं है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि व्यापारियों को लाइसेंस जारी करना और समय-समय पर उसका नवीनीकरण कराना नगर निगम की जिम्मेदारी है। ऐसे में प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा गरीब और मेहनतकश व्यापारियों को नहीं भुगतना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मछली, मीट और मांस के कारोबार से हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है, जिनमें मल्लाह, निषाद, बंगाली, मुस्लिम सहित कई समुदायों के लोग शामिल हैं। उनका आरोप था कि धार्मिक भावनाओं के नाम पर इन समुदायों को शहर से बाहर करने का प्रयास सामाजिक न्याय और संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।
ज्ञापन में मांग की गई कि प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए, सभी पात्र विक्रेताओं का विशेष अभियान चलाकर पंजीकरण एवं लाइसेंस जारी किए जाएं तथा किसी भी गरीब परिवार की आजीविका प्रभावित न होने दी जाए।
नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपने वालों में कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, प्रदेश प्रवक्ता संजीव सिंह, अब्दुला खान, कुसुम वर्मा, धनंजय, गुलशन अली, मनीष शर्मा, रोजा मैथ्यूज, रमज़ान अली, सुमित सोनकर, सनी सोनकर, ओकास अंसारी, प्रदीप राजभर सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

