लमही से उठी समान शिक्षा की आवाज, बीएचयू तक पहुंचेगी तीन दिवसीय पदयात्रा
वाराणसी (जनवार्ता)। सभी बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर वाराणसी में तीन दिवसीय पदयात्रा शुरू हो गई है। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित समाजसेवी डॉ. संदीप पांडेय के नेतृत्व में निकली यह यात्रा मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही से प्रारंभ हुई। यह यात्रा लोकबंधु राजनारायण के गांव गंजारी होते हुए 15 जुलाई को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में संपन्न होगी।
पदयात्रा का उद्देश्य सरकार और समाज का ध्यान समान शिक्षा व्यवस्था की ओर आकर्षित करना है। अभियान का मुख्य नारा है— “चाहे अमीर की हो या गरीब की संतान, सबकी शिक्षा हो समान।”

यात्रा के शुभारंभ पर लमही में आयोजित जनसभा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षकों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है, लेकिन आज भी जाति, धर्म, भाषा, लिंग और आर्थिक स्थिति के आधार पर शिक्षा में असमानता बनी हुई है।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. संदीप पांडेय ने कहा कि शिक्षा सामाजिक न्याय और समान अवसर का सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि देश में वास्तविक समानता स्थापित करनी है तो प्रत्येक बच्चे को बिना किसी भेदभाव के एक जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करानी होगी।
इस दौरान वक्ताओं ने मुंशी प्रेमचंद और महात्मा गांधी के शिक्षा संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और लोकतंत्र को मजबूत करने का आधार है। उन्होंने शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण पर चिंता जताते हुए समान शिक्षा नीति लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उधर, दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आंदोलन जारी है। वाराणसी की पदयात्रा और दिल्ली का आंदोलन इस बात का संकेत हैं कि समान शिक्षा का मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक न्याय और समान अवसर की बहस का केंद्र बनता जा रहा है।

