100 करोड़ की जमीन के राजस्व आदेश पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
वाराणसी (जनवार्ता)।प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की कृषि भूमि से जुड़े एक राजस्व आदेश को लेकर विवाद गहरा गया है। अधिवक्ता मनीष कुमार सिंह ने राजस्व परिषद् उत्तर प्रदेश, आयुक्त वाराणसी मंडल, जिलाधिकारी वाराणसी तथा उपजिलाधिकारी राजातालाब को शिकायत भेजकर नायब तहसीलदार, सेवापुरी दीपाली मौर्या द्वारा वाद संख्या टी202514700319262 (दशरथ बनाम बलिया) में 14 जुलाई 2026 को पारित आदेश की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि से जुड़े इस मामले में स्थापित विधिक सिद्धांतों, न्यायालय के क्षेत्राधिकार और प्रक्रियागत नियमों की अनदेखी करते हुए आदेश पारित किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2001 के नामांतरण आदेश के विरुद्ध दायर तजबीजसानी प्रार्थना-पत्र का वर्ष 2006 में गुण-दोष के आधार पर अंतिम निस्तारण हो चुका था और उस आदेश को किसी उच्च न्यायालय में चुनौती नहीं दी गई। इसके बावजूद वर्षों बाद उसी विषय पर दोबारा कार्यवाही कर अंतिम आदेश पारित किया जाना विधि के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि वाद की पोषणीयता पर पहले निर्णय लिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा किए बिना सीधे मुख्य प्रकरण पर विचार किया गया। साथ ही रिकॉल प्रार्थना-पत्र लंबित रहने के बावजूद अंतिम आदेश पारित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। न्यायालय की आदेश-पत्रिका, पेशी बही तथा कम्प्यूटरीकृत अभिलेखों में प्रक्रियागत अनियमितताओं का भी आरोप लगाया गया है।
अधिवक्ता मनीष कुमार सिंह ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने, जांच पूरी होने तक न्यायालय की आदेश-पत्रिका, पेशी बही, कम्प्यूटरीकृत अभिलेख और मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा जांच में अनियमितता सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध सेवा नियमों एवं प्रचलित कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि राजस्व न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता और कानून के शासन से जुड़ा है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि से संबंधित मामलों में यदि न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो आम नागरिक का न्याय व्यवस्था पर विश्वास प्रभावित होता है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सत्य सामने लाया जाना आवश्यक है।

