गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा पूर्ण कर काशी पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, 27 तक रहेगा प्रवास
वाराणसी (जनवार्ता)। गौमाता संरक्षण के उद्देश्य से गोरखपुर से शुरू हुई 81 दिवसीय गविष्ठी धर्मयुद्ध यात्रा पूर्ण कर ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शनिवार को काशी पहुंचे। जिसमें काशीवासियों, संतों और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा व जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया।


भक्तों के आग्रह पर शंकराचार्य पालकी से हरिश्चंद्र घाट मार्ग होते हुए श्रीविद्यामठ पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मठ प्रभारी ब्रह्मचारी परमात्मानंद ने आरती-पूजन कराया। इसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।वही मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि शंकराचार्य 27 जुलाई तक काशी प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान उनके सान्निध्य में विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। जो 27 जुलाई की शाम संत और भक्त चरण पादुका पूजन कर उनका अभिनंदन करेंगे। जबकि 28 जुलाई को वह छत्तीसगढ़ के बेमेतरा स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां दो माह का चातुर्मास्य व्रत करेंगे। इस दौरान रविवार दोपहर दो बजे श्रीविद्यामठ, शंकराचार्य घाट पर वह गौरक्षा आंदोलन के संबंध में पत्रकारों से संवाद करेंगे। इस स्वागत में साध्वी पूर्णांबा, स्वामी प्रतूक्चैतन्यमुकुंदानंद गिरी,स्वामी निधिरव्यानंद सागर,देवेंद्र पाण्डेय,शैलेन्द्र योगी,सक्षम सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

