गुरु की सच्ची प्रसन्नता शिष्यों के श्रेष्ठ आचरण में निहित : बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम
वाराणसी (जनवार्ता)। गुरुपूर्णिमा के अवसर पर आयोजित सायंकालीन गोष्ठी में श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम ने कहा कि गुरु की सच्ची प्रसन्नता शिष्यों के श्रेष्ठ आचरण, सदाचार और सफलता में निहित होती है।


उन्होंने कहा कि केवल गुरु की प्रशंसा से नहीं, बल्कि उनकी शिक्षाओं को जीवन में उतारने से ही वास्तविक श्रद्धा सिद्ध होती है। उन्होंने युवाओं से सत्संग, सद्ग्रंथों और गुरु-वाणी से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि कुसंगति, हिंसा, स्वार्थ और नैतिक पतन समाज को विनाश की ओर ले जाते हैं। वही कबीरदास के दोहे “दुर्बल को न सताइये…” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कर्म का फल अवश्य मिलता है, इसलिए अन्याय, अहंकार और शोषण से दूर रहना चाहिए। उन्होंने समाज में बढ़ती नकारात्मकता, अंधविश्वास, महिलाओं पर अत्याचार और मिलावटी खाद्य पदार्थों पर चिंता जताते हुए संयम, विवेक और जागरूकता से जीवन जीने की प्रेरणा दी। बताया कि आज प्रत्येक व्यक्ति में साधु की करुणा और सैनिक का साहस होना चाहिए। गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. विजय प्रताप ने की। जिसमें मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के एडीजीपी विवेकानंद रहे। वही धन्यवाद ज्ञापन संस्था के व्यवस्थापक हरिहर यादव ने किया।

