लाखों की हाईमास्ट लाइट बेकार, अंधेरे में सिमटी उम्मीदें; ग्रामीणों ने प्रशासन को लगाई गुहार
चौबेपुर (जनवार्ता): स्थानीय थाना क्षेत्र की सुरक्षा और रौशनी की बड़ी उम्मीद बनकर आई हाईमास्ट लाइट आज महज एक बेजान शो-पीस बनकर रह गई है। मुनारी चौराहे पर करीब ₹5 लाख की लागत से स्थापित इस आधुनिक लाइटिंग सिस्टम का विद्युत कनेक्शन पिछले छह माह से कटा पड़ा है, जिससे इस इलाके में रात के अंधेरे में दुर्घटनाओं और असुरक्षा का ग्राफ बढ़ गया है।

जानकारी के अनुसार, हाईमास्ट लाइट से करंट उतरने की शिकायत मिलने के बाद विद्युत विभाग ने एहतियातन इसका कनेक्शन काट दिया था। मगर तकनीकी खराबी को दुरुस्त करने की बजाय विभाग ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। छह महीने बीत जाने के बाद भी न तो मरम्मत की गई और न ही नया कनेक्शन दिया गया, जिसके चलते यह विशाल खंभा चौराहे पर बोझ बनकर खड़ा है।
स्थानीय ग्रामीणों पूर्व मंडल अध्यक्ष हरेंद्र सिंह का कहना है कि रात होते ही चौराहा पूरी तरह अंधकारमय हो जाता है, जिसके चलते छोटी-बड़ी वाहन दुर्घटनाएं लगातार होती रहती हैं। इस अंधेरे का सबसे बड़ा खामियाजा सुरक्षा व्यवस्था को भी भुगतना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत द्वारा यातायात नियंत्रण और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन रोशनी के अभाव में रात्रि के फुटेज इतने धुंधले आ रहे हैं कि न तो वाहन नंबर पढ़े जा सकते हैं और न ही चेहरे की पहचान हो पाती है।
ग्रामीण नागेंद्र यादव ने बताया कि यह हाईमास्ट लाइट पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्र नाथ पांडे द्वारा क्षेत्रवासियों को सौगात स्वरूप लगवाई गई थी। इसकी कीमत करीब ₹5 लाख आंकी गई थी, लेकिन विभागीय उदासीनता ने इस सार्वजनिक संपत्ति को बेकार कर दिया है।
आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के अधिकारियों से इस समस्या पर संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही हाईमास्ट लाइट को दोबारा चालू नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। आम जनता की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए प्रशासन को इस मामले में त्वरित एवं गंभीर कदम उठाने की आवश्यकता है।
उक्त मौके पर ग्रामीणों में कारिया गुप्ता, रामचंद्र राजभर, विजय खरवार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

