मन के बंधनों से आजादी ही वास्तविक मुक्ति : सतगुरु माता सुदीक्षा जी

मन के बंधनों से आजादी ही वास्तविक मुक्ति : सतगुरु माता सुदीक्षा जी

वाराणसी (जनवार्ता)। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संत निरंकारी मिशन की ओर से आंतरिक स्वतंत्रता और ब्रह्मज्ञान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से मुक्ति पर्व का आयोजन किया गया। दिल्ली स्थित निरंकारी सरोवर के समक्ष सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन सान्निध्य में मुख्य आयोजन हुआ। वहीं वाराणसी के मलदहिया स्थित सत्संग भवन में भी विशेष सत्संग आयोजित किया गया।

rajeshswari

सत्संग को ज्ञान प्रचारक संतोष सिंह ने संबोधित करते हुए ब्रह्मज्ञान, प्रेम, भक्ति और सद्भाव का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक मुक्ति केवल बाहरी बंधनों से आजादी नहीं, बल्कि अज्ञान, अहंकार, नफरत, भेदभाव और पूर्वाग्रहों से मुक्त होने में है।

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि हर सांस में निराकार परमात्मा का एहसास रखते हुए प्रेम, स्वीकार्यता और सकारात्मकता के साथ जीवन जीना ही जीते-जी मुक्ति है। उन्होंने माता सविंदर जी के जीवन से प्रेरणा लेने और परिस्थितियां कैसी भी हों, भीतर शांति एवं प्रेम की रोशनी बनाए रखने का आह्वान किया।

मुक्ति पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं ने महान संत विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। सतगुरु माता जी ने कहा कि संतों की शिक्षाओं को केवल सुनना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें विचार, कर्म और जीवन में उतारना ही वास्तविक साधना है।

कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि जिस प्रकार भौतिक स्वतंत्रता राष्ट्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करती है, उसी प्रकार ब्रह्मज्ञान की ज्योति मनुष्य को अपनी वास्तविक पहचान का बोध कराकर प्रेम, शांति और सद्भाव के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

इसे भी पढ़े   वीडीए : रोजाना 300-400 लीटर ईंधन बचाने का लक्ष्य, शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने की पहल
Shiv murti

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *