चिकित्सा प्रतिपूर्ति की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
पेंशनर्स कल्याण संस्था की बैठक में कई मांगों पर चर्चा
वाराणसी (जनवार्ता) । उत्तर प्रदेश पेंशनर्स कल्याण संस्था, शाखा वाराणसी की मासिक बैठक रविवार को पेंशनर्स कक्ष, कोषागार परिसर कचहरी में जिलाध्यक्ष इंजीनियर एस.डी. मिश्र की अध्यक्षता में हुई। संचालन जिलामंत्री अवध नारायण पाण्डेय ने किया। बैठक में पेंशनरों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में संस्था के प्रांतीय संरक्षक इंजीनियर शमसुल आरेफिन तथा जनपदीय संरक्षक इंजीनियर आर.पी. मिश्र भी मौजूद रहे। शुरुआत में नए सदस्यों का परिचय कराया गया। इसके बाद सितंबर माह में जन्मे पेंशनरों का जन्मदिन मिठाई खिलाकर मनाया गया। जिलामंत्री ने पिछली बैठक की कार्यवाही पढ़कर सुनाई, जिसे सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित किया।
वक्ताओं ने कहा कि पेंशनरों को पूर्व में मिल रही सुविधाओं में लगातार कटौती हो रही है। कैशलेस उपचार की सुविधा का भी पेंशनरों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति के लिए पहले भौतिक रूप से आवेदन करने की व्यवस्था थी, जिसे 24 जुलाई 2026 से बंद कर दिया गया। अब नौ सितंबर 2026 के शासनादेश के माध्यम से चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के आवेदन जनहित स्वास्थ्य पोर्टल के जरिए किए जाने की व्यवस्था की गई है और भौतिक आवेदन को अमान्य कर दिया गया है। संस्था ने इसे पेंशनरों के लिए और अधिक जटिल बताते हुए पुरानी भौतिक आवेदन व्यवस्था तत्काल बहाल करने की मांग की।
बैठक में वैलिडेशन एक्ट-2025 वापस लेने, आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के विचारणीय बिंदुओं में एक जनवरी 2026 से पूर्व सेवानिवृत्त पेंशनरों के पेंशन पुनरीक्षण को शामिल करने, वरिष्ठ नागरिकों को रेल किराये में मिलने वाली छूट बहाल करने तथा रोके गए 18 माह के महंगाई राहत के एरियर का भुगतान करने की मांग उठाई गई।
इसके अलावा पेंशन राशिकरण की कटौती अवधि 15 वर्ष से घटाकर 11 वर्ष करने तथा 65, 70 और 75 वर्ष की आयु पूरी करने पर क्रमशः पांच, दस और 15 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन देने की मांग भी की गई।
संस्था ने निर्णय लिया कि प्रदेशव्यापी आह्वान के तहत 24 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे जिलाधिकारी, वाराणसी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
बैठक को इंजीनियर डी.एल. श्रीवास्तव, हीरालाल, डॉ. परमहंस मिश्र, डॉ. सुधाकर मिश्र, इंजीनियर एस.एन. मणि, नागेंद्र सिंह, हीरालाल प्रसाद, अमरदेव, प्रभाकर दुबे, शिव प्रकाश, वी.एन. त्रिपाठी, दयाशंकर सिंह यादव, रामजग, राकेश मोहन पाण्डेय, शैलकुमारी, शकुंतला देवी, सावित्री देवी और रामचंद्र गुप्ता आदि ने संबोधित किया।

