वाराणसी रोपवे परियोजना : विकास की उड़ान में सुरक्षा और निजता दांव पर
■ मकानों के ऊपर से गुजरती केबल कार ने बढ़ाई चिंता

वाराणसी(जनवार्ता)। धर्म नगरी काशी में जाम से निजात दिलाने के लिए बहुप्रतीक्षित रोपवे परियोजना जल्द ही चालू होने जा रही है। लेकिन इस आधुनिक परिवहन प्रणाली की एक बड़ी खामी ने स्थानीय नागरिकों की नींद उड़ा दी है। यह रोपवे शहर की घनी आबादी वाले इलाकों और कॉलोनियों में बने मकानों के ठीक ऊपर से गुजरेगा, जिससे आम शहरियों के जीवन, संपत्ति और निजता (प्राइवेसी) पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ को अमलीजामा पहनाते समय सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ताक पर रख दिया गया है। आमतौर पर ऐसी परियोजनाओं में सुरक्षा बफर जोन होता है, लेकिन यहां भारी-भरकम ट्रॉलियां लोगों की छतों के ठीक ऊपर से गुजरेंगी।
सुरक्षा के साथ-साथ निजता का हनन यहां एक बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है। वाराणसी जैसे शहर में छतें और खुले आंगन घरों का अभिन्न हिस्सा होते हैं। अब हर दिन गुजरने वाली सैकड़ों ट्रॉलियों में बैठे यात्री सीधे लोगों के घरों के भीतर, आंगनों और छतों पर नजर डाल सकेंगे। इससे परिवारों का अपने ही घर के खुले हिस्सों में जाना असहज हो जाएगा और उनकी पारिवारिक गोपनीयता पूरी तरह छिन जाएगी।
बताया जा रहा है कि भविष्य में रोपवे के अलाइनमेंट के ठीक नीचे आने वाले भवनों का अधिग्रहण किया जाएगा। लेकिन चिंता का विषय यह है कि फिलहाल बिना अधिग्रहण किए ही इस परियोजना को संचालित करने की तैयारी है। जब तक अधिग्रहण और विस्थापन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक लोगों के सिर पर दुर्घटना का साया मंडराता रहेगा और उन्हें अपनी निजता से हर पल समझौता करना पड़ेगा।
विकास और आधुनिक सुविधाएं शहर की प्रगति के लिए आवश्यक हैं, लेकिन यह नागरिकों की सुरक्षा और उनके व्यक्तिगत जीवन की गोपनीयता की कीमत पर नहीं होना चाहिए। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि रोपवे का व्यावसायिक संचालन शुरू करने से पहले सुरक्षा और निजता की स्थिति की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और प्रभावित भवनों के अधिग्रहण की स्थिति स्पष्ट की जाए।
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