मऊ : फर्जी दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने वाला सिपाही गिरफ्तार
दो महिलाओं समेत चार सलाखों के पीछे
मऊ (जनवार्ता)। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोप में जेल जा चुके पुलिस आरक्षी विशाल भारती ने अपने खिलाफ चल रहे मुकदमे को कमजोर करने और पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रची। पुलिस ने इस मामले का पर्दाफाश करते हुए सिपाही विशाल भारती समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में दो महिलाएं भी शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2023 में एक नाबालिग लड़की ने सिपाही विशाल भारती के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने और अंतरंग वीडियो प्रसारित करने का आरोप लगाया था। इस मामले में सात जुलाई 2023 को मुहम्मदाबाद गोहना कोतवाली में दुष्कर्म, पॉक्सो अधिनियम और आईटी अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। आरोपी सिपाही इस मामले में करीब सात महीने जेल में रहा था। फिलहाल मुकदमे की सुनवाई मऊ की सत्र अदालत में चल रही है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि पुराने मुकदमे में सजा की आशंका और पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से विशाल भारती ने अपने साथियों के साथ मिलकर दूसरी साजिश रची। आरोप है कि उसने अपनी महिला मित्र सकीना खातून को रुपये का लालच देकर नाबालिग पीड़िता के पिता मोहम्मद इमरान अहमद के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया। 23 जुलाई 2026 को सकीना की शिकायत पर कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज किया गया था।
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस को आरोपियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल, बैंक खातों में लेनदेन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से अहम सुराग मिले। जांच में सिपाही विशाल भारती के अलावा उसके साथी निसार उर्फ नेसार अहमद और जोया उर्फ गुल निहार की भूमिका भी सामने आई। पुलिस का दावा है कि इन लोगों ने मिलकर पुराने मुकदमे को प्रभावित करने और पीड़िता के पिता को दबाव में लाने की योजना बनाई थी।
पुलिस अधीक्षक सर्वेश कुमार मिश्रा के निर्देशन में कोतवाली नगर पुलिस ने शनिवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे सोनीधापा मैदान के पास से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में पुलिस लाइन मऊ में तैनात आरक्षी विशाल भारती, सकीना खातून, बलिया निवासी निसार उर्फ नेसार अहमद और गाजीपुर निवासी जोया उर्फ गुल निहार शामिल हैं। सभी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने विवेचना में मिले साक्ष्यों के आधार पर फर्जी मुकदमे में नामजद मोहम्मद इमरान अहमद की भूमिका गलत पाए जाने की बात कही है। मूल मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 और 351(2) हटाकर धारा 217, 231 और 61(2) की बढ़ोतरी की गई है। इमरान अहमद को इस मामले से राहत दिलाने के लिए न्यायालय में साक्ष्यों के साथ प्रार्थना पत्र देने की कार्रवाई भी की गई है।
पुलिस अधीक्षक ने मामले का पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम को दस हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल है। वहीं, नाबालिग से जुड़े मूल दुष्कर्म के मुकदमे की सुनवाई अदालत में जारी है।

