राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: SIT ने सरकार को सौंपी 150 पन्नों की रिपोर्ट

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: SIT ने सरकार को सौंपी 150 पन्नों की रिपोर्ट

5 साल के ऑडिट की सिफारिश

अयोध्या (जनवार्ता)। राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने मंगलवार को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी। टीम के सदस्य सुबह प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद के कार्यालय पहुंचे और करीब 150 पन्नों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में लगभग 150 लोगों से पूछताछ के आधार पर तैयार किए गए निष्कर्ष शामिल हैं।

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सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने पिछले पांच वर्षों में मंदिर में प्राप्त चढ़ावे का स्वतंत्र ऑडिट कराने की सिफारिश की है। इसके अलावा दान राशि के संग्रहण, गणना और बैंकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने तथा अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए कई प्रशासनिक सुझाव भी दिए गए हैं। रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा।

एसआईटी ने 15 जून से 20 जून तक लगातार छह दिनों तक जांच की। इस दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, व्यवस्थापक गोपाल राव, ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा, चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों और नोट गिनने वाली निजी एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की गई। ट्रस्ट के 11 माह के दस्तावेजों, बैंक स्टेटमेंट और अन्य वित्तीय अभिलेखों की भी गहन जांच की गई। टीम ने संबंधित व्यक्तियों के बैंक खातों से जुड़ी जानकारी जुटाई, बयानों का मिलान किया और साक्ष्य संकलित कर जांच सामग्री के साथ लखनऊ लौट गई।

मामला उस समय चर्चा में आया जब 7 जून को पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की अनियमितता हुई है। इसके बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। वहीं, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि अब तक चोरी की पुष्टि करने वाला कोई तथ्य सामने नहीं आया है।

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विवाद बढ़ने पर भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद एसआईटी ने व्यापक पड़ताल शुरू की और छह दिनों तक जांच करने के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। हालांकि, रिपोर्ट अभी प्रारंभिक मानी जा रही है और किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय किए जाने अथवा आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधी निर्णय सरकार और संबंधित एजेंसियों की आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

Shiv murti

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