बीएचयू के सवाल पर विवाद: प्रोफेसर बिन्दा परांजपे बोलीं- ‘ब्राह्मण और ब्राह्मणवाद में फर्क समझना जरूरी’
वाराणसी (जनवार्ता)। (बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी) में एमए इतिहास की परीक्षा में पूछे गए ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ से जुड़े सवाल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र वायरल होने के बाद कई संगठनों ने इसे ब्राह्मण समाज का अपमान बताया, जबकि विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर बिन्दा परांजपे ने इस विरोध को खारिज करते हुए कहा कि “ब्राह्मण और ब्राह्मणवाद में अंतर समझना जरूरी है।”

चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में छात्रों से पूछा गया था— “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता से आप क्या समझते हैं? प्राचीन इतिहास में इसने महिलाओं की प्रगति में किस तरह बाधा डाली?” प्रश्न सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा समेत कई संगठनों ने सवाल पर आपत्ति जताई और इसे समाज विशेष को निशाना बनाने वाला बताया। वहीं, प्रोफेसर बिन्दा परांजपे ने कहा कि यह प्रश्न पाठ्यक्रम का हिस्सा है और अकादमिक विमर्श के तहत पूछा गया है।
उन्होंने कहा, “जो लोग ब्राह्मण और ब्राह्मणवाद में अंतर नहीं समझते, वही ऐसे सवालों का विरोध कर रहे हैं। यह सवाल सिलेबस में शामिल है और इसमें कोई समस्या नहीं है। विरोध करने वालों का अकादमिक अध्ययन कमजोर है।”
प्रोफेसर परांजपे ने कहा कि सवाल का उद्देश्य छात्रों की आलोचनात्मक समझ का आकलन करना था। उन्होंने काशी की सामाजिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि “जिस काशी में विधवा विवाह का समर्थन हुआ और जहां एनी बेसेंट जैसी हस्तियों का सम्मान है, वहां ऐसे सवाल पर विवाद होना दुखद है।”
महिलाओं के संघर्ष पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में अपाला, गार्गी, मीरा बाई, सावित्रीबाई फुले और रमाबाई जैसी महिलाओं ने लंबा संघर्ष किया। उन्होंने यह भी कहा कि “ब्राह्मणवाद एक मानसिकता है, जो केवल किसी एक वर्ण तक सीमित नहीं है।”
उत्तर प्रदेश में इससे पहले भी ब्राह्मणों से जुड़े प्रश्नों और फिल्मों को लेकर विवाद हो चुके हैं। यूपी पुलिस दरोगा भर्ती परीक्षा में ब्राह्मणों को लेकर पूछे गए एक सवाल पर राजनीतिक विवाद हुआ था, जिसके बाद भर्ती बोर्ड ने खेद जताया था। वहीं ‘घूसखोर पंडित’ नामक फिल्म के शीर्षक को लेकर भी विरोध और एफआईआर दर्ज होने के बाद निर्माताओं को माफी मांगनी पड़ी थी।

