बीएचयू में साइकिल चलाकर दिया प्रदूषण-मुक्त शहर का संदेश

बीएचयू में साइकिल चलाकर दिया प्रदूषण-मुक्त शहर का संदेश

उठी सुरक्षित साइकिल लेन की मांग

rajeshswari

वाराणसी (जनवार्ता)। पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए रविवार सुबह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में ‘साइकिल पर संडे’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। क्लाइमेट एजेंडा संस्था के ‘हरित सफ़र’ अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने साइकिल चलाकर जलवायु परिवर्तन से निपटने और शून्य उत्सर्जन वाले परिवहन को बढ़ावा देने का संदेश दिया।

रविवार को सुबह 8 बजे से 10 बजे तक विश्वनाथ मंदिर परिसर से शुरू हुए इस कार्यक्रम में बीएचयू, वसंत कन्या महाविद्यालय और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेष रूप से मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) विभाग के इंटर्न और वॉलंटियरों की सक्रिय भूमिका रही।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शहरवासियों के बीच साइकिल चलाने की संस्कृति को पुनर्जीवित करना था। आयोजकों ने बताया कि वर्तमान समय में परिवहन क्षेत्र ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का बड़ा स्रोत है। बढ़ते निजी वाहनों के कारण वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में साइकिल जैसे नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट (NMT) को अपनाना न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि शहरों को प्रदूषण-मुक्त और रहने योग्य बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान आयोजकों और छात्रों ने शहर प्रशासन से सुरक्षित साइकिल लेन और नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट के लिए बेहतर शहरी अवसंरचना विकसित करने की जोरदार मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक सड़कों पर साइकिल चलाने वालों के लिए अलग से सुरक्षित लेन और पैदल यात्रियों के लिए अच्छे फुटपाथ नहीं बनेंगे, तब तक साइकिल को आमजन तक पहुंचाना मुश्किल रहेगा। बीएचयू जैसे सुरक्षित परिसर के बाहर वाराणसी की सड़कें साइकिल सवारों के लिए अभी भी जोखिम भरी हैं।

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इस आयोजन में एमएसडब्ल्यू विभाग के छात्र दीपक कोरी, तन्मय कुमार, वैभव, ऋतिका, अनन्या उपाध्याय, वैष्णव, प्रियांशी, रोहित और पवन ने प्रमुख भूमिका निभाई। क्लाइमेट एजेंडा की ओर से गीता पासवान ने पूरे वॉलंटियर और इंटर्न टीम का नेतृत्व किया।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद क्लाइमेट एजेंडा की प्रोग्राम डायरेक्टर **एकता शेखर** ने सभी प्रतिभागियों का आभार जताते हुए कहा, “साइकिल का आविष्कार कभी आवाजाही की समस्या हल करने के लिए हुआ था। आज जलवायु संकट के दौर में हमें फिर से साइकिल को अपनाने की जरूरत है। यह न केवल पर्यावरण बचाएगा, बल्कि हमारे स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाएगा।”

Shiv murti

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