नाव पर इफ्तार केस में 8 को राहत, 6 की जमानत पर 18 मई को सुनवाई
वाराणसी (जनवार्ता)। गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी और नॉनवेज परोसने के चर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से 8 आरोपियों को जमानत मिल गई है। करीब 60 दिन जेल में बिताने के बाद अब ये आरोपी रिहा हो सकेंगे। वहीं, मामले में शामिल अन्य 6 आरोपियों की जमानत अर्जी पर 18 मई को सुनवाई होगी।


इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें राजीव लोचन शुक्ला और जितेंद्र कुमार सिन्हा शामिल थे, ने आरोपियों की जमानत मंजूर की। सबसे पहले दानिश सैफी, आमिर कैफी और नुरुल इस्लाम की ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई थी, जबकि अन्य आरोपियों ने बाद में अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने सभी 14 आरोपियों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की।
यह मामला 16 मार्च को सामने आया था, जब भाजपा युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने वाराणसी के कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसी दिन कार्रवाई करते हुए 14 युवकों को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद एसीपी कोर्ट से भी आरोपियों को राहत नहीं मिली और सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।
28 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया था कि आरोपियों ने नाविक को धमकाकर नाव अपने कब्जे में ले ली थी और बीच गंगा में इफ्तार पार्टी आयोजित की थी। पुलिस के अनुसार, नाविक ने पार्टी के दौरान आपत्ति भी जताई, लेकिन युवकों ने उसकी बात अनसुनी कर दी।
पुलिस ने यह भी कहा कि इफ्तार पार्टी के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने का उद्देश्य एक विशेष संदेश देना था। वीडियो में पहले मस्जिद के दृश्य दिखाए गए, इसके बाद गंगा नदी और नाव पर सजे दस्तरखान को अलग-अलग एंगल से फिल्माया गया। बिरयानी और अन्य व्यंजनों के वीडियो भी बनाए गए थे।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हिंदूवादी संगठनों ने विरोध जताया। वीडियो में चिकन बिरयानी परोसे जाने की बात सामने आने पर मामला और गरमा गया। इसके बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
बताया गया कि इफ्तार पार्टी में शामिल सभी युवक वाराणसी के मदनपुरा इलाके के ताड़तल्ला मोहल्ले के रहने वाले हैं और अधिकांश एक ही परिवार से जुड़े हैं। इनकी उम्र 19 से 25 वर्ष के बीच बताई गई है।

