वर्षों तक पढ़ाने वाले शिक्षक खुद बने परीक्षार्थी
विशेष टीईटी में दिखा भावुक नजारा
वाराणसी। शिक्षक पात्रता परीक्षा (विशेष टीईटी) को लेकर मंगलवार को वाराणसी के उदय प्रताप (यूपी) कॉलेज परिसर स्थित परीक्षा केंद्र पर अलग ही नजारा देखने को मिला। वर्षों से विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक जब खुद परीक्षार्थी बनकर परीक्षा देने पहुंचे तो उनके साथ उनके बच्चे भी नजर आए। कोई स्कूटी से तो कोई बाइक से अपने मम्मी-पापा को परीक्षा केंद्र तक छोड़ने पहुंचा। परीक्षा देकर बाहर निकले अभिभावकों से बच्चों ने भी उत्सुकता से पूछा- पेपर कैसा गया?

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित विशेष टीईटी परीक्षा दो पालियों में संपन्न हुई। इसमें वाराणसी के अलावा बलिया, गोरखपुर, देवरिया, गाजीपुर और प्रयागराज समेत कई जनपदों से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। परीक्षा केंद्र पर प्रशासनिक अमला मुस्तैद रहा, वहीं लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों के चेहरों पर परीक्षा को लेकर चिंता और मानसिक दबाव भी दिखाई दिया।
परीक्षा केंद्र के बाहर भावुक और दिलचस्प दृश्य देखने को मिले। जिन शिक्षकों ने जीवनभर अपने बच्चों को मन लगाकर पढ़ने और परीक्षा में अच्छे अंक लाने की सीख दी, मंगलवार को उन्हीं शिक्षकों को उनके बच्चे परीक्षा देने के लिए प्रोत्साहित करते नजर आए। कई शिक्षक सेवानिवृत्ति के करीब हैं। ऐसे में उनके लिए इस उम्र में दोबारा परीक्षा की तैयारी करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। परीक्षा समाप्त होने के बाद बच्चों का अपने माता-पिता से पेपर का हाल पूछना भी चर्चा का विषय बना रहा।
परीक्षा देकर बाहर निकले अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र के स्तर को मिलाजुला बताया। गोरखपुर से परीक्षा देने आए शिक्षक दिलीप कुमार ने बताया कि उन्होंने विज्ञान वर्ग से परीक्षा दी। उनके अनुसार प्रश्नपत्र न तो बहुत कठिन था और न ही बहुत आसान, बल्कि मध्यम स्तर का रहा। हालांकि शिक्षकों की सबसे बड़ी चिंता प्रश्नपत्र से अधिक इस बात को लेकर थी कि लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन्हें इस उम्र में पात्रता परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है।
देवरिया से परीक्षा देने पहुंचे शिक्षक अमरेंद्र यादव ने कहा कि विद्यालयों में शिक्षण कार्य के साथ ही शिक्षकों पर तमाम प्रशासनिक जिम्मेदारियों का भी बोझ रहता है। ऐसे में इस उम्र में परीक्षा की तैयारी करना और उसमें शामिल होना काफी कष्टकारी है। उन्होंने शासन की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षकों को लगातार पात्रता परीक्षा के मानसिक दबाव से गुजरना पड़ रहा है।
गाजीपुर से परीक्षा देने आईं शिक्षिका सुशीला यादव ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि उनकी सेवानिवृत्ति में अब मात्र सात वर्ष शेष हैं। लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं देने के बाद करियर के अंतिम पड़ाव पर परीक्षा और पास-फेल की चिंता से गुजरना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से शिक्षकों के आत्मसम्मान और मानसिक शांति पर भी असर पड़ रहा है।
बहरहाल, उदय प्रताप कॉलेज परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विशेष टीईटी परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। परीक्षा केंद्र से बाहर निकलते शिक्षकों के चेहरों पर जहां परीक्षा का तनाव दिखा, वहीं उनके साथ आए बच्चों का उत्साह और अपने माता-पिता के प्रति चिंता भी देखने को मिली।

