धनतेरस पर खुलेंगे माता अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी कपाट
पांच दिनों तक होंगे दुर्लभ दर्शन
वाराणसी (जनवार्ता)। धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में धनतेरस के अवसर पर माता अन्नपूर्णा मंदिर में पांच दिवसीय स्वर्णमयी दर्शन उत्सव का शुभारंभ होगा। मंदिर प्रशासन के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार धनतेरस की सुबह चार बजे विधि-विधान से माता अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी कपाट खोले जाएंगे। इसके बाद सुबह पांच बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू हो जाएंगे, जो लगातार जारी रहेंगे।

मान्यता है कि जगत के पालनहार बाबा विश्वनाथ स्वयं माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगते हैं। इसी पौराणिक परंपरा के तहत वर्ष में एक बार धनतेरस पर माता का स्वर्णमयी स्वरूप भक्तों के दर्शनार्थ खोला जाता है। पांच दिनों तक चलने वाले इस दुर्लभ दर्शन के लिए देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन ने विशेष दर्शन व्यवस्था की है। भक्तों को मंदिर के गेट नंबर एक से कतारबद्ध होकर प्रथम तल पर पहुंचना होगा। यहां माता अन्नपूर्णा, भूमि, लक्ष्मी जी तथा याचक स्वरूप में भिक्षा मांग रहे बाबा विश्वनाथ के दिव्य दर्शन होंगे। दर्शन के उपरांत श्रद्धालुओं को माता के खजाने का प्रसाद वितरित किया जाएगा। इसमें धान का लावा और सिक्के शामिल होंगे। धार्मिक मान्यता है कि इस प्रसाद को घर की तिजोरी अथवा धन रखने के स्थान पर सहेजकर रखने से सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है।
पांच दिवसीय आयोजन के अंतिम चरण में 10 नवंबर को भव्य अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर माता को लगभग 17 से 18 टन विभिन्न प्रकार की मिठाइयों, व्यंजनों और छप्पन भोग का प्रसाद अर्पित किया जाएगा। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के बीच कच्चा भोग निःशुल्क वितरित करने की भी व्यवस्था की गई है।
इस वर्ष आयोजन में करीब 8 से 10 लाख श्रद्धालुओं के काशी पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप सहित लगभग 10 से 12 देशों के श्रद्धालुओं के भी माता के दरबार में हाजिरी लगाने की संभावना है। श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा, यातायात नियंत्रण तथा दर्शनार्थियों की कतारों के प्रबंधन के लिए विशेष तैयारियां की हैं।

