रास्ते के विवाद से परेशान महिला ने फांसी लगाकर दी जान
23 घंटे से घर के बाहर पड़ा शव
वाराणसी । बड़ागांव थाना क्षेत्र के अहरक गांव में रास्ते और जमीन संबंधी विवाद से परेशान एक महिला ने बुधवार रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि जब तक रास्ते का विवाद नहीं सुलझाया जाता, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। इसके चलते करीब 23 घंटे तक शव घर के बाहर पड़ा रहा।


परिजनों के अनुसार, महिला लंबे समय से करीब छह फीट चौड़े रास्ते को लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रही थी। आरोप है कि करीब दो वर्ष पहले पड़ोसियों ने नवीन परती जमीन पर बने रास्ते पर चाहरदीवारी कर आवागमन बंद कर दिया। इसके बाद परिवार करीब दो फीट चौड़े वैकल्पिक रास्ते से आने-जाने को मजबूर था।
मृतका के पुत्र विशाल का आरोप है कि रास्ते की समस्या को लेकर परिवार ने जिलाधिकारी कार्यालय में कई बार शिकायत की। करीब एक वर्ष पहले धरना भी दिया गया था। तहसील में एसडीएम को कई प्रार्थना पत्र देने के बाद 22 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी की जनसुनवाई में भी शिकायत की गई थी। परिजनों का कहना है कि 12 अगस्त को शिकायत पर आख्या लगाकर मामले को निस्तारित दिखा दिया गया।
परिजनों के मुताबिक, रास्ते के विवाद को लेकर महिला काफी समय से मानसिक रूप से परेशान थी। बुधवार को दिन में किसी समय उसने घर के सामने बने शौचालय में साड़ी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। पत्नी की मौत की सूचना मिलने पर पति संतोष उपाध्याय दिल्ली से गांव पहुंचे। मृतका के तीन पुत्रियां और एक पुत्र हैं।
गुरुवार दोपहर करीब दो बजे तक शव दरवाजे पर पड़े रहने की सूचना पर एसडीएम, नायब तहसीलदार, एसीपी पिंडरा, कानूनगो और लेखपाल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर अंतिम संस्कार के लिए समझाने का प्रयास किया। इस दौरान विपक्षी पक्ष से पंचायत भवन में अकेले बातचीत किए जाने को लेकर परिजनों की एसडीएम से नोकझोंक भी हुई।
एसडीएम कुंदन राजकपूर ने बताया कि मृतका का परिवार रास्ते के पुराने विवाद से संबंधित दीवानी मुकदमा हार चुका है। वर्तमान में विवादित रास्ते से संबंधित मामला तहसीलदार न्यायालय में लंबित है। प्रशासनिक अधिकारी परिजनों से बातचीत कर मामले को शांत कराने और शव का अंतिम संस्कार कराने के प्रयास में जुटे हैं।

