“युवाओं को अपने इतिहास और पूर्वजों से सीख लेकर जुनून के साथ लक्ष्य साधना चाहिए” — प्रो. योगेंद्र सिंह
जीवनदीप ने मनाई पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह की 100वीं जयंती
वाराणसी (जनवार्ता)। बड़ा लालपुर स्थित जीवनदीप महाविद्यालय के शिक्षा विभाग द्वारा शुक्रवार को नर्सिंग हॉल में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह की 100वीं जयंती “चंद्रशेखर जन्मशती समारोह” के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर उनकी श्वेत प्रतिमा का विधिवत उद्घाटन भी किया गया।


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ हुआ। जीवनदीप समूह के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार सिंह एवं वाइस चेयरमैन डॉ. अंशु सिंह ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। इस दौरान मूर्तिकार एवं बीएफए के प्रवक्ता धीरेन्द्र कुमार को प्रतिमा निर्माण के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में जननायक विश्वविद्यालय बलिया के पूर्व कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि समाज के हर वर्ग को अपने पूर्वजों और सभ्यता के इतिहास को जानना चाहिए। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर जी ने युवा अवस्था में ही छात्रसंघ में प्रधानमंत्री पद हासिल कर लिया था और अपने लक्ष्य को जुनून के साथ साधते हुए देश के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित और जुनूनी होता है, वही जीवन में आगे बढ़ता है। समूह के चेयरमैन डा. सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर जी प्रधानमंत्री रहते हुए भी आम जनता से जुड़े रहे। “युवा तुर्क” के रूप में उनकी पहचान उनके गंभीर, संतुलित और प्रभावशाली वक्तव्यों के कारण बनी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के हिंदी विभाग के प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर जी ने राजनीति में गुटबाजी को समाप्त करने का प्रयास किया और वे आचार्य नरेंद्र देव, डॉ. राम मनोहर लोहिया और जय प्रकाश नारायण के समाजवादी विचारों से प्रभावित थे। वहीं प्रो. श्रद्धानंद ने उन्हें समाजवादी विचारधारा की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि उनकी सोच राजनीति में परिवारवाद को समाप्त करने की थी, और आज के समय में उनके जैसे नेता मिलना दुर्लभ है। कार्यक्रम का संचालन बीएड प्रवक्ता अल्का सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ खिलाड़ी नन्हे सिंह द्वारा दिया गया। इस अवसर पर गुप्तेश्वर सिंह शास्त्री (फाउंडर, चंद्रशेखर फाउंडेशन शक्ति पीठ सारनाथ), महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. इन्द्रेश चंद्र सिंह, रजिस्ट्रार नंदलाल यादव, उप-प्राचार्य डॉ. अमित कुमार सिंह, बीटीसी प्राचार्य डॉ. नंदा द्विवेदी सहित अन्य शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र उपस्थित रहे।

