सुप्रीम कोर्ट ने जौनपुर के जिलाधिकारी पर लगाया 50 हजार रुपये का जुर्माना
वाराणसी (जनवार्ता) । सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के जिलाधिकारी (डीएम) पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई अदालत के पूर्व आदेशों की अवहेलना और ग्राम सभा की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को हटाने में लापरवाही बरतने के कारण की गई है।

मामला सदर तहसील क्षेत्र के कंधरपुर गांव की लगभग छह बीघा ग्राम सभा की सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिस पर 1966 से अवैध कब्जा चल रहा था। पीड़ित जयप्रकाश दुबे (जिनकी अब मृत्यु हो चुकी है) ने इस कब्जे को हटाने के लिए शिकायत की थी। मामला लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2023 में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां कोर्ट ने जमीन खाली कराने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
लेकिन जौनपुर प्रशासन द्वारा इन आदेशों का पालन नहीं किया गया। हालिया सुनवाई में न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की खंडपीठ ने पाया कि न तो संतोषजनक जवाब दाखिल किया गया और न ही आदेशों का अनुपालन हुआ। इससे नाराज होकर कोर्ट ने डीएम डॉ. दिनेश चंद्र सिंह पर 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यह राशि दो सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन के वेलफेयर फंड में जमा की जाए। साथ ही, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाबी हलफनामा दाखिल करने और स्पष्टीकरण देने का भी आदेश दिया था, लेकिन उसमें भी संतोषजनक प्रगति नहीं हुई।
यह घटना सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि ग्राम सभाओं की सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा हो सके ।

