सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर बीएचयू में पहले नियमितीकरण, फिर भर्ती की मांग
वाराणसी (जनवार्ता)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के दैनिक भोगी एवं संविदा कर्मचारियों द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे धरने को विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ महामंत्री डॉ. सूबेदार सिंह का पूर्ण समर्थन मिला है।


डॉ. सिंह ने कहा कि वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने धर्म सिंह एवं अन्य के मामले में स्पष्ट आदेश दिया था कि जो दैनिक भोगी एवं संविदा कर्मचारी लंबे समय से कार्यरत हैं, उन्हें नियमित (परमानेंट) किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश “लॉ ऑफ द लैंड” होता है, जिसका पालन हर संस्थान के लिए अनिवार्य है।
डॉ. सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन के इस तर्क को सरासर भ्रामक बताया कि विज्ञापित पदों का इन कर्मचारियों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी विगत कई वर्षों से ठीक उन्हीं पदों पर कार्य कर रहे हैं, इसलिए पहले इन कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाना चाहिए, उसके बाद ही किसी भी प्रकार का नया विज्ञापन या भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी बिना स्वीकृत पद के लंबे समय से कार्य कर रहा है, तो इसका मतलब है कि वहां पद की आवश्यकता है। ऐसे में नए पदये सृजित करके संबंधित कर्मचारियों को परमानेंट किया जाना चाहिए।
डॉ. सूबेदार सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की कि कर्मचारियों के प्रति उदारतापूर्ण व्यवहार करते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप पहले इन्हें नियमित करें, उसके बाद ही कोई अन्य भर्ती या प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।

