भैरहवा में कचरा संकट गहराया, तीन दिन से सफाई व्यवस्था ठप
भैरहवा। सीमावर्ती शहर भैरहवा इन दिनों गंभीर कचरा संकट से जूझ रहा है। पिछले तीन दिनों से कचरा उठान बंद होने के कारण शहर के कई हिस्सों में कचरे के ढेर लग गए हैं, जिससे आमजन के साथ-साथ पर्यटकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लुंबिनी के प्रवेशद्वार के रूप में पहचाने जाने वाले इस शहर की सूरत कचरे के अंबार से बिगड़ती जा रही है। बेलहिया सीमा, आंखा अस्पताल, देवकोटा चौक, बुद्ध चौक और भैरहवा-लुंबिनी मार्ग स्थित लुंबिनी गेट के आसपास हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। तेज गर्मी और हवा के कारण कचरे से उठ रही दुर्गंध ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है, वहीं उड़ता कचरा आसपास के इलाकों में फैलकर प्रदूषण को भी बढ़ा रहा है।
नगरपालिका के अनुसार, भैरहवा में प्रतिदिन 15 टन से अधिक कचरा निकलता है, लेकिन इसके निस्तारण की व्यवस्था फिलहाल पूरी तरह ठप है। इस संकट की मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट ऑफ नेपाल द्वारा सिद्धार्थनगर नगरपालिका क्षेत्र के डण्डा खोला में कचरा डंपिंग पर लगाई गई अंतरिम रोक है। अदालत के अंतिम निर्णय तक इस स्थल के उपयोग पर रोक रहने से शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है।
सिद्धार्थनगर नगरपालिका के प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत जनक थापा ने बताया कि गुरुवार से घर-घर कचरा संग्रह के दौरान जैविक और अजैविक कचरे को अलग-अलग करने की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके लिए जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैविक कचरे से खाद और बायोगैस बनाने तथा अजैविक कचरे के पुनः उपयोग की योजना पर काम किया जा रहा है।
हालांकि, शहर में पहले से जमा कचरे के निस्तारण को लेकर नगरपालिका कोई स्पष्ट रणनीति नहीं बता सकी है। उधर, सिद्धार्थ उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष नेत्र प्रसाद आचार्य ने कहा कि व्यापारी कचरा अलग रखने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक यह संभव नहीं है। उन्होंने स्थायी डंपिंग साइट के चयन के लिए राजनीतिक स्तर पर ठोस पहल की मांग की है।

