वाराणसी में मलेरिया के मामलों में कमी, फिर भी सतर्कता जरूरी
वाराणसी (जनवार्ता)। हर वर्ष 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को मलेरिया के प्रति जागरूक करना और इसके नियंत्रण व रोकथाम पर जोर देना है। वाराणसी में पिछले कुछ वर्षों में मलेरिया के मामलों में कमी दर्ज की गई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अप्रैल से जून तथा वर्षा ऋतु को अब भी उच्च जोखिम वाला समय बताया है।

मलेरिया एक वेक्टर जनित बीमारी है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। यह मच्छर प्लाज्मोडियम परजीवी को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाता है। गंदा और जमा हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन का प्रमुख कारण है। कूलर, पुराने टायर, गमले और छतों पर जमा पानी इसके मुख्य स्रोत हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्ति तथा भीड़भाड़ और जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोग मलेरिया के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, अत्यधिक पसीना, सिरदर्द, बदन दर्द, उल्टी और कमजोरी शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न बरतते हुए तुरंत जांच कराना जरूरी है।
मलेरिया नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ‘अर्ली डायग्नोसिस, प्रॉम्प्ट ट्रीटमेंट’ अभियान चलाया जा रहा है। हॉटस्पॉट क्षेत्रों में फीवर कैंप लगाए जा रहे हैं और किसी संक्रमित मरीज के मिलने पर आसपास के 40 घरों की स्क्रीनिंग की जाती है। नगर निगम के सहयोग से फॉगिंग और दवा का छिड़काव भी किया जा रहा है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में 69, 2023 में 27, 2024 में 13, 2025 में 15 और 2026 में अब तक 3 मलेरिया के मामले सामने आए हैं, जो कमी की ओर संकेत करते हैं।
बचाव के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने देना, कूलर और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करना, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करना, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना और मच्छररोधी क्रीम या स्प्रे का इस्तेमाल करना जरूरी है। बुखार आने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
मलेरिया होने की स्थिति में तुरंत रक्त जांच कराना, डॉक्टर की सलाह से दवाएं लेना, पूरा उपचार कोर्स पूरा करना और पर्याप्त आराम व तरल पदार्थ लेना आवश्यक है। स्वयं दवा लेने से बचना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मामलों में कमी सकारात्मक संकेत है, लेकिन खतरा अभी समाप्त नहीं हुआ है। जागरूकता, साफ-सफाई और समय पर उपचार ही मलेरिया से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

